गौरव कोचर
नई दिल्ली: मध्य प्रदेश से कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त होने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंच गया है। इस मामले पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता और अदालत के बीच तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को ‘शॉकिंग’ (स्तब्ध करने वाला) बताया, तो वहीं सुप्रीम कोर्ट ने साफ रुख अपनाते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया के बीच में ‘हम कुछ नहीं कर सकते।’ कोर्ट ने इस चरण में हस्तक्षेप करने से साफ इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया।
’जो हुआ वो शॉकिंग है’: सिंघवी की दलीलें
सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने रिटर्निंग ऑफिसर (RO) के फैसले की वैधानिकता पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने अदालत के समक्ष दलीलें रखते हुए कहा:
- जिस निजी शिकायत (Private Complaint) को आधार बनाकर नामांकन पत्र खारिज किया गया है, उस मामले में अब तक किसी भी सक्षम अदालत ने संज्ञान (Cognizance) तक नहीं लिया है।
- जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 33ए के तहत उम्मीदवार को केवल उन्हीं आपराधिक मामलों की जानकारी देना अनिवार्य होता है, जिनमें आरोप तय हो चुके हों और दो साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान हो।
- सिंघवी ने जोर देकर कहा कि जिस मामले में अभी न्यायिक प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई, उसे ‘जानकारी छिपाना’ मानकर नामांकन रद्द कर देना पूरी तरह से गलत और हैरान करने वाला (शॉकिंग) है।
’हम प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकते’: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
सिंघवी की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 329 (b) का हवाला देते हुए कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा:
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- एक बार जब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो अदालत रिट याचिका के माध्यम से उसके बीच में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
- पीठ ने टिप्पणी की कि चुनावी प्रक्रिया के इस चरण में ‘हम कुछ नहीं कर सकते।’ यदि नामांकन गलत तरीके से भी खारिज हुआ है, तो उसका एकमात्र कानूनी उपचार चुनाव संपन्न होने के बाद ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) दाखिल करना है।
- शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से ऐसा कोई भी पुराना फैसला दिखाने को कहा जहां कोर्ट ने स्क्रूटनी के स्तर पर हस्तक्षेप कर नामांकन को दोबारा बहाल किया हो।
पृष्ठभूमि: मीनाक्षी नटराजन ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पर्चा दाखिल किया था। विपक्षी दल की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई थी कि उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक शिकायत की जानकारी हलफनामे में नहीं दी, जिसके बाद रिटर्निंग अधिकारी ने उनका नामांकन निरस्त कर दिया था।
लोकतंत्र और संविधान को झटका: मीनाक्षी नटराजन
सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “यह मेरा व्यक्तिगत झटका नहीं है, बल्कि यह देश के लोकतंत्र और संविधान को लगा बड़ा झटका है। चुनाव आयोग के सदस्य पूरी तरह से समझौतावादी रुख अपनाए हुए हैं। जब हमारे लोग शिकायत लेकर गए तो आयोग ने 48 घंटे तक कोई जवाब नहीं दिया। कम से कम सुप्रीम कोर्ट ने हमारी बात सुनी तो सही।”
अदालत ने याचिका खारिज करने के साथ ही यह साफ कर दिया है कि इस आदेश का असर भविष्य में हाई कोर्ट के समक्ष दायर होने वाली किसी भी चुनाव याचिका पर नहीं पड़ेगा, यानी कांग्रेस के पास चुनाव के बाद हाई कोर्ट जाने का विकल्प खुला रहेगा।