भोपाल। गौरव कोचर/मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से पहले ही सियासी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं। चुनाव आयोग के रिटर्निंग ऑफिसर ने कांग्रेस की कद्दावर नेता और राहुल गांधी की करीबी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज कर दिया है। इसके साथ ही विधानसभा में संख्या बल होने के बावजूद कांग्रेस के हाथ से एक तय सीट खिसक गई है। अब मैदान में केवल भाजपा के तीन उम्मीदवार बचे हैं, जिससे भाजपा का तीनों सीटों पर निर्विरोध जीतना लगभग तय हो गया है।
इनसाइड स्टोरी: तेलंगाना से मिले सुराग ने बिगाड़ा खेल
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के ‘तेलंगाना के कांग्रेस मित्रों’ को दिए धन्यवाद ने इस पूरी इनसाइड स्टोरी का खुलासा कर दिया है। दरअसल, मीनाक्षी नटराजन जब तेलंगाना कांग्रेस की प्रभारी थीं, तब वहां के एक अंदरूनी मामले को लेकर अगस्त 2025 में हैदराबाद की अदालत में एक निजी शिकायत (Private Complaint) दर्ज हुई थी, जिसमें नटराजन को कोर्ट से समन जारी हुआ था।
कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी के चलते तेलंगाना के ही कुछ नेताओं ने इस कोर्ट केस और समन से जुड़े गोपनीय दस्तावेज मध्य प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा दिए। भाजपा ने इसी को हथियार बनाया और रिटर्निंग ऑफिसर के सामने आपत्ति दर्ज कराई कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे (Form 26) में इस लंबित मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है।
संख्या बल का गणित: कैसे हुआ कांग्रेस का नुकसान?
मध्य प्रदेश विधानसभा की मौजूदा स्थिति के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता थी।
- कांग्रेस का गणित: कांग्रेस के पास 65 विधायक थे, जो जीत के आंकड़े (58) से 7 ज्यादा थे। मीनाक्षी नटराजन का उच्च सदन में जाना तय था।
- भाजपा का गणित: भाजपा के पास 163 विधायक हैं। अपने दो उम्मीदवारों को 58-58 वोट देने के बाद भी भाजपा के पास 47 सरप्लस वोट बच रहे थे, जिसके दम पर उसने महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतारा था।
अब आगे क्या?
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद अब 3 सीटों के लिए केवल 3 ही उम्मीदवार (सभी भाजपा से) मैदान में बचे हैं। चुनाव नियमों के मुताबिक, अब वोटिंग की जरूरत नहीं पड़ेगी और नाम वापसी की अवधि खत्म होते ही भाजपा के तीनों उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा।
कांग्रेस का रातभर धरना, अब सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
इस फैसले के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने भोपाल में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर रातभर धरना दिया। वहीं, दिल्ली में अभिषेक मनु सिंहवी और दिग्विजय सिंह सहित कांग्रेस के शीर्ष वकीलों का एक प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय चुनाव आयोग पहुंचा। कांग्रेस ने इस कार्रवाई को ‘एकतरफा’ बताते हुए इस फैसले को हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है।