राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने आदिवासियों के बीच मनाया जन्मदिन, बच्चों को सुनाई प्रेरक कहानियां
By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जयपुर, 17 अगस्त 2025।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने जन्मदिन का जश्न इस बार अनूठे अंदाज़ में मनाया। उन्होंने सलूम्बर जिले के आदिवासी बहुल गांव बरोड़ा में पहुंचकर स्थानीय जनजातीय समुदाय के साथ आत्मीय संवाद किया और पूरे दिन आदिवासियों के बीच बिताया।
शनिवार की शाम राज्यपाल गांव पहुंचे और वहीं रात्रि विश्राम किया। रात को उन्होंने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, खाट पर बैठकर उनसे संवाद किया और उनकी समस्याओं व परंपराओं को नजदीक से जाना। ग्रामीणों ने राज्यपाल को अपने बीच पाकर उत्साह और गर्व महसूस किया।

बच्चों के बीच मनाया जन्मदिन
रविवार सुबह राज्यपाल बरोड़ा के एकलव्य मॉडल स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने आदिवासी बच्चों के साथ जन्मदिन का केक काटा और सबसे पहले उन्हें ही खिलाया। उन्होंने बच्चों से घुल-मिलकर बातें कीं और उन्हें कड़ी मेहनत से पढ़ाई करने व जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
बच्चों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने मेवाड़ की वीर गाथाओं का उल्लेख किया और महाराणा प्रताप व भील समुदाय के योगदान की कहानियां सुनाईं। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वास्तविक परिवर्तन का साधन है और आदिवासी बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

वृक्षारोपण और संवाद
राज्यपाल ने गांव में वृक्षारोपण अभियान की शुरुआत की और ग्रामीणों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश साझा किया। साथ ही उन्होंने भील समाज की परंपराओं व संस्कृति के संरक्षण पर चर्चा की और आदिवासी समुदाय से इस दिशा में सतत प्रयास करने का आह्वान किया।
योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद तक पहुंचे
अपने जन्मदिन के मौके पर आयोजित लाभार्थी संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल ने किसानों व जरूरतमंदों को चेक वितरित किए और अधिकारियों को निर्देश दिए कि केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत जैसी आरोग्य योजनाएं आदिवासी व गरीब समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने आदिवासी उत्पादों के विपणन पर जोर देते हुए उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कही।
शिक्षा पर विशेष जोर
राज्यपाल बागडे ने अधिकारियों और ग्रामीणों से अपील की कि आदिवासी बच्चों को शत-प्रतिशत शिक्षा से जोड़ा जाए। उन्होंने हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि शिक्षा ही आदिवासी समाज के विकास की असली कुंजी है।