राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने किया विश्व धरोहर कुम्भलगढ़ दुर्ग का अवलोकन: धरोहर संरक्षण और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर दिया विशेष बल

राजसमंद, 25 जून 2026 /नरेश गुनानी/राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे गुरुवार को अपनी राजसमंद यात्रा के दौरान विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक कुम्भलगढ़ दुर्ग पहुंचे। यहां उन्होंने महान योद्धा महाराणा प्रताप की जन्मस्थली के दर्शन किए और दुर्ग के विभिन्न ऐतिहासिक हिस्सों का पैदल चलकर बारीकी से अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने इस प्राचीन स्थापत्य कला और दुर्ग की बेमिसाल भव्यता की जमकर सराहना की।

​ऐतिहासिक विरासत से जुड़े नई पीढ़ी: राज्यपाल

​भ्रमण के दौरान राज्यपाल बागडे ने कुम्भलगढ़ दुर्ग के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के बारे में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि राजस्थान की इस महान दुर्ग संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत से नई पीढ़ी को प्रभावी ढंग से जोड़ा जाना बेहद जरूरी है।

​उन्होंने कहा:

​”ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण हमारी सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है। यह हमारे गौरवशाली इतिहास की वह खिड़की है जिससे भावी पीढ़ियां अपनी जड़ों और संस्कृति से परिचित होती हैं। इसलिए इस अमूल्य धरोहर के संरक्षण और संवर्धन को हमारी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए।”

 

​विश्व स्तर पर हो और अधिक प्रचार-प्रसार

​राज्यपाल ने कुम्भलगढ़ दुर्ग की दुनिया भर में मशहूर विशाल प्राचीर (दीवार), इसके भीतर बने भव्य महलों, और महाराणा कुंभा के उपासना स्थल ऐतिहासिक शिव मंदिर का विशेष रूप से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि चीन की दीवार के बाद दुनिया की सबसे लंबी दीवार के रूप में विख्यात इस प्राचीर और यहाँ की वास्तुकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में और अधिक प्रचारित व प्रसारित किया जाना चाहिए।

​पर्यटकों की सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश

​पर्यटन को बढ़ावा देने और दुर्ग की व्यवस्थाओं को और बेहतर करने के उद्देश्य से राज्यपाल बागडे ने संबंधित प्रशासनिक और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि:

  • ​दुर्ग परिसर में आने वाले देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जाए।
  • ​पर्यटकों की सुरक्षा, गाइड व्यवस्था और सुगम आवागमन के लिए मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को और मजबूत (सुदृढ़) किया जाए।
  • ​ऐतिहासिक ढांचे को बिना कोई नुकसान पहुंचाए आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का समावेश किया जाए।

​इस दौरान स्थानीय प्रशासन, पुरातत्व विभाग के अधिकारी और सुरक्षा बल के आला अधिकारी भी राज्यपाल के साथ मौजूद रहे।

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