राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ में की शिरकत; जैन जीवन दर्शन को अपनाने पर दिया जोर
| नरेश गुनानी
जयपुर, 14 फरवरी 2026 राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे शनिवार को जयपुर में साध्वी डॉ. कुमुद लता जी महाराज के पावन सान्निध्य में आयोजित ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ में सम्मिलित हुए। इस आध्यात्मिक समागम के दौरान राज्यपाल ने महासती डॉ. कुमुद लता के प्रति श्रद्धा प्रकट करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और समाज में नैतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना पर अपने विचार साझा किए।
जैन धर्म केवल पंथ नहीं, एक संपूर्ण संस्कृति: राज्यपाल
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हरिभाऊ बागडे ने कहा कि जैन धर्म को केवल एक संप्रदाय के रूप में देखना संकुचित होगा, वास्तव में यह एक महान संस्कृति और जीवन जीने की पद्धति है। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से जैन दर्शन के तीन प्रमुख स्तंभों को आत्मसात करने का आह्वान किया:
- तप: स्वयं को अनुशासित कर आंतरिक शक्ति को जागृत करना।
- अहिंसा: मन, वचन और कर्म से किसी को कष्ट न पहुँचाना।
- अपरिग्रह: अनावश्यक संचय का त्याग कर संतोषमय जीवन जीना।
उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की यह पावन धरा सदियों से साधु-साध्वियों के पुण्य प्रताप और उनकी ज्ञान साधना के कारण ही आध्यात्मिक रूप से समृद्ध रही है।
अनुष्ठान: अनुशासन और आत्म-प्रकाश का मार्ग
राज्यपाल ने ‘शांति एवं सद्भाव अनुष्ठान’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए इसे भारतीय संस्कृति की एक गौरवशाली परंपरा बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
”अनुष्ठान का अर्थ केवल बाहरी क्रियाकांड या रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि यह स्वयं को एक उच्च अनुशासन में ढालने की प्रक्रिया है। वास्तविक ज्ञान वह नहीं जो केवल सूचनाओं का अंबार खड़ा करे, बल्कि वह है जो मनुष्य के भीतर विवेक जगाकर उसके जीवन को प्रकाशित कर दे।”
मानवता के कल्याण हेतु एकजुटता की अपील
भाषण के अंत में राज्यपाल ने मानव जाति के उत्कर्ष और जनकल्याण के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करने की प्रेरणा दी। उन्होंने साध्वी डॉ. कुमुद लता जी के त्यागपूर्ण जीवन को प्रेरणा का स्रोत बताया और समाज एवं धर्म की सेवा में समर्पित प्रमुख व्यक्तित्वों का अभिनंदन भी किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे, जिन्होंने शांति और सद्भाव के संकल्प के साथ अनुष्ठान में भाग लिया।
