राज्यपाल बागडे ने नगाड़ा बजाकर किया शिल्पग्राम उत्सव का शुभारंभ लोक कला जीवन का असली आलोक है – राज्यपाल कोरियोग्राफिक फोक डांस, लोक गीत मेडले और लावणी–कथक सिंफनी ने दर्शकों का मन मोहा

राज्यपाल बागडे ने नगाड़ा बजाकर किया शिल्पग्राम उत्सव का शुभारंभ
लोक कला जीवन का असली आलोक है – राज्यपाल
कोरियोग्राफिक फोक डांस, लोक गीत मेडले और लावणी–कथक सिंफनी ने दर्शकों का मन मोहा

| नरेश गुनानी
22 दिसम्बर 2025, जयपुर।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि “लोक है तो आलोक है और लोक कला जीवन का असली आलोक है, क्योंकि इसमें कोई बनावट नहीं बल्कि नैसर्गिकता है।” वे केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर द्वारा हवाला स्थित शिल्पग्राम में आयोजित दस दिवसीय शिल्पग्राम उत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
राज्यपाल ने अन्य अतिथियों के साथ दीप प्रज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया तथा नगाड़ा बजाकर शिल्पग्राम उत्सव का विधिवत आगाज किया। उन्होंने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से आह्वान किया कि बच्चों को कला एवं संस्कृति की शिक्षा दी जाए और उन्हें मंच प्रदान किया जाए, जिससे लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हो सके।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में बचपन में मिले प्रोत्साहन से महान शिल्पकार बनने का उदाहरण देते हुए सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के शिल्पकार राम वी. सुतार का उल्लेख किया और कहा कि सही मार्गदर्शन से प्रतिभाएं विश्वस्तरीय पहचान बना सकती हैं।
देशभर की लोक कलाओं का भव्य महासंगम
उद्घाटन समारोह में प्रस्तुत कोरियोग्राफिक लोक नृत्य प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसमें गोवा का देखनी और घोड़े मोदनी, मणिपुर का लाई हारोबा, कश्मीर का राउफ, राजस्थान का लाल आंगी और चरी, कर्नाटक का पूजा कुनिता और ढालू कुनिता, महाराष्ट्र का सोंगी मुखौटा, पंजाब का लुड्डी तथा गुजरात का तलवार रास और राठवा नृत्य शामिल रहे।
दिल्ली के प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सुशील शर्मा के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति में मंच पर देश की विविध संस्कृतियों का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसे दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
कथक–लावणी फ्यूजन ने बिखेरा आकर्षण
समारोह में श्रद्धा सतवीडकर की मराठी लावणी और नितिन कुमार के शास्त्रीय कथक की फोक–क्लासिकल सिंफनी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। लोक और शास्त्रीय नृत्य के इस अनूठे संगम ने शिल्पग्राम परिसर को तालियों से गुंजायमान कर दिया। कलाकारों की लयकारी, भाव-भंगिमाएं और रंग-बिरंगे परिधान दर्शकों को बार-बार “वाह-वाह” कहने पर मजबूर करते रहे।
लोक कला क्षेत्र में योगदान के लिए सम्मान
समारोह में डॉ. कोमल कोठारी स्मृति लाइफटाइम अचीवमेंट लोक कला पुरस्कार से राजकोट (गुजरात) के डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु और जयपुर (राजस्थान) के रामनाथ चौधरी को सम्मानित किया गया। प्रत्येक पुरस्कार में रजत पट्टिका के साथ 2.51 लाख रुपये की राशि प्रदान की गई।
रामनाथ चौधरी दुनिया के एकमात्र कलाकार हैं जो अल्गोजा नाक से बजाने की दुर्लभ कला में पारंगत हैं। वहीं, डॉ. निरंजन वल्लभभाई राज्यगुरु ने लोक और भक्ति संगीत पर गहन फील्ड वर्क करते हुए लगभग 700 घंटे का ध्वनि मुद्रांकन किया है।
एक भारत–श्रेष्ठ भारत का जीवंत उदाहरण
समारोह में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि शिल्पग्राम उत्सव एक भारत–श्रेष्ठ भारत की भावना का सजीव प्रतीक है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन देश की समृद्ध परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र होते हैं।
दस दिनों तक चलने वाला शिल्पग्राम उत्सव देशभर की लोक कलाओं, शिल्प और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रदर्शन प्रस्तुत करेगा, जिसमें देश-विदेश से आए कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को भारतीय संस्कृति के रंगों से रूबरू कराएंगे।

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