राज्यपाल को सौंपा गया लोकायुक्त का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन: पारदर्शिता और जवाबदेही पर हुई चर्चा

राज्यपाल को सौंपा गया लोकायुक्त का 37वां वार्षिक प्रतिवेदन: पारदर्शिता और जवाबदेही पर हुई चर्चा

जयपुर, 2 जनवरी 2026

| नरेश गुनानी

​राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से शुक्रवार को लोकायुक्त न्यायमूर्ति प्रताप कृष्ण लोहरा ने लोकभवन में शिष्टाचार भेंट की। इस मुलाकात के दौरान लोकायुक्त ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में शुचिता और पारदर्शिता को लेकर तैयार किया गया 37वां वार्षिक प्रतिवेदन राज्यपाल को प्रस्तुत किया।

​प्रतिवेदन की मुख्य बातें

​प्रताप कृष्ण लोहरा द्वारा सौंपा गया यह प्रतिवेदन 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक की अवधि के कामकाज पर आधारित है। इस रिपोर्ट में राज्य के विभिन्न विभागों में भ्रष्टाचार के विरुद्ध की गई कार्रवाई, प्राप्त शिकायतों के निस्तारण और लोक सेवकों के आचरण से संबंधित विस्तृत विवरण शामिल है।

​प्रमुख चर्चा के बिंदु:

  • प्रशासनिक पारदर्शिता: मुलाकात के दौरान हरिभाऊ बागडे और प्रताप कृष्ण लोहरा के बीच लोक प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के विषयों पर गंभीर चर्चा हुई।
  • लोक सेवकों की जवाबदेही: लोकायुक्त ने राज्यपाल को विस्तार से अवगत कराया कि किस प्रकार लोकायुक्त सचिवालय लोक सेवकों की जनता के प्रति जवाबदेही तय करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।
  • संस्थान की भूमिका: लोकायुक्त ने संस्थान के स्तर पर किए गए नवाचारों और लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट भी साझा की।

​संवैधानिक महत्व

​लोकायुक्त एक महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार विरोधी संस्था है। नियमानुसार, लोकायुक्त को अपने कार्यों का वार्षिक लेखा-जोखा राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करना होता है, जिसे बाद में राज्यपाल के माध्यम से राज्य विधानसभा के पटल पर रखा जाता है।

​राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में लोकायुक्त संस्थान के प्रयासों की सराहना की और पारदर्शिता बनाए रखने पर बल दिया।

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