| लोकेंद्र सिंह शेखावत
— हथरोई किला स्थित प्राचीन मंदिर में हुआ माता का मनमोहक श्रृंगार
— साधु-संतों और भक्तों ने एक साथ बैठकर ग्रहण की प्रसादी
जयपुर। गुलाबी नगरी में पौष मास के साथ ही धार्मिक उत्सवों और पौष बड़ा प्रसादी की धूम मची हुई है। इसी कड़ी में मंगलवार को विधायकपुरी थाने के समीप हथरोई किला स्थित प्राचीन राजेश्वरी माता मंदिर में भव्य पौष बड़ा महोत्सव का आयोजन किया गया। भक्ति और श्रद्धा के इस समागम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और प्रसादी ग्रहण की।

माता का आकर्षक श्रृंगार और छप्पन भोग
महोत्सव की शुरुआत मंगलवार सुबह माता रानी के विशेष पूजन-अर्चन के साथ हुई। सोनिया दासी दीदी ने बताया कि इस अवसर पर माँ राजेश्वरी को नवीन पोशाक धारण कराई गई और पुष्पों से उनका मनमोहक श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात माता को गरमा-गरम दाल के बड़े, हलवा, पूड़ी और विशेष रूप से तैयार सब्जी का भोग अर्पित किया गया।
पंगत प्रसादी और संतों का सान्निध्य
दोपहर में प्रसादी का दौर शुरू हुआ, जिसमें साधु-संतों के साथ जयपुर के विभिन्न कोनों से आए सैंकड़ों श्रद्धालुओं ने पंगत में बैठकर प्रसादी ग्रहण की। मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ के जयकारों से गूँज उठा। वर्तमान में महंत सीताराम महाराज की देखरेख में मंदिर के समस्त धार्मिक और सामाजिक कार्यों का संचालन किया जा रहा है।
इतिहास के झरोखे से
मंदिर की ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए सोनिया दासी दीदी ने बताया कि इस स्थान का जयपुर के राजघराने से गहरा संबंध है। जयपुर के तत्कालीन महाराज सवाई मानसिंह ने माता श्रद्धानंद सरस्वती को यह हथरोई किला भेंट किया था, जिसके बाद से ही यहाँ शक्ति की उपासना अनवरत जारी है।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक परंपरा का निर्वहन किया, बल्कि आपसी भाईचारे और सामूहिकता का संदेश भी दिया। देर शाम तक मंदिर में भक्तों के आने-जाने का सिलसिला जारी रहा।

