राजस्व सेवाओं में गुणवत्ता और बेहतर मॉनिटरिंग के निर्देश

नरेश गुनानी 

​अजमेर स्थित राजस्व मंडल में आयोजित समीक्षा बैठक में टी. रविकांत ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आमजन से जुड़े राजस्व संबंधी कार्यों को अधिक मुस्तैदी और आपसी समन्वय के साथ पूरा किया जाए। बैठक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:

  • न्यायालयी कार्यों में सुधार: अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों के कार्य निष्पादन में गुणात्मक सुधार लाने के लिए उन्होंने प्रभावी मॉनिटरिंग और फॉलो-अप करने की आवश्यकता बताई।
  • नवाचार हेतु सुझाव: राजस्व सेवाओं को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाने के लिए उन्होंने अधिकारियों से उपयोगी सुझाव भेजने को कहा।
  • प्रशासनिक चर्चा: राजस्व मंडल के निबंधक महावीर प्रसाद ने मंडल के प्रशासनिक दायित्वों और वर्तमान कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

​बैठक में अतिरिक्त निबंधक (न्याय) हेमंत स्वरूप माथुर, उपनिबंधक रविंद्र कुमार, उपनिबंधक सुनीता यादव, वित्तीय सलाहकार सोहन सिंह और सांख्यिकी निदेशक बीना वर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

आरआरटीआई का निरीक्षण: प्रशिक्षण और शोध पर जोर

​प्रमुख शासन सचिव ने राजस्व अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (आरआरटीआई) का भी गहन निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान की प्रशिक्षण पद्धतियों और तकनीकी संसाधनों के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए:

  • प्रशिक्षण का विस्तार: टी. रविकांत ने कहा कि आरआरटीआई में केवल आरटीएस (RTS) ही नहीं, बल्कि रीडर्स और अन्य अधीनस्थ राजस्व कार्मिकों के लिए भी नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।
  • पटवार प्रशिक्षण केंद्रों में सुधार: उन्होंने प्रदेश भर में संचालित पटवार प्रशिक्षण विद्यालयों की सेवाओं को और बेहतर बनाने के निर्देश दिए।
  • तकनीकी संसाधनों का आधुनिकीकरण: संस्थान में नवीनतम शोध सामग्री, तकनीकी संसाधनों के विस्तार और रिफ्रेशर कोर्सेज शुरू करने पर जोर दिया गया।
  • पुस्तकालय एवं परिसर अवलोकन: उन्होंने आवासीय परिसर और पुस्तकालय का अवलोकन करते हुए निर्देश दिए कि शोध विशेषज्ञों की सेवाएं लेने और नवीनतम राजस्व साहित्य की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रस्ताव तैयार किए जाएं।

प्रशासनिक मुस्तैदी का संदेश

​प्रमुख शासन सचिव के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को और अधिक जन-केंद्रित बनाना रहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग के लोक महत्व के दायित्वों को पूरा करने में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जानी चाहिए। संस्थान में नवाचारों और शोध गतिविधियों को बढ़ावा देकर राजस्व प्रशासन को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

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