राजस्थान: PMFBY के तहत हनुमानगढ़ में ₹2,253.55 करोड़ और गंगानगर में ₹840.05 करोड़ के फसल बीमा दावों का हुआ भुगतान
जयपुर/ नरेश गुनानी/ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के अंतर्गत वर्ष 2021-22 से 2025-26 की पांच वर्षों की अवधि के दौरान राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में 2,253.55 करोड़ रुपये और गंगानगर जिले में 840.05 करोड़ रुपये के दावों का सफलतापूर्वक भुगतान किया गया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह विस्तृत जानकारी साझा की।
1. क्षेत्रीय दृष्टिकोण और दावा निर्धारण प्रक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि PMFBY मुख्य रूप से ‘क्षेत्रीय दृष्टिकोण’ (Area Approach) पर आधारित है। इसमें बीमित फसल की वास्तविक उपज में कमी के आधार पर भू-खंड स्तर पर मुआवजे के दावे निर्धारित किए जाते हैं।
- आकलन प्रक्रिया: उपज में कमी का आकलन राज्य सरकार द्वारा कराए जाने वाले फसल कटाई प्रयोगों (CCE) और तकनीक आधारित प्रणाली यस-टेक (YES-TECH) के माध्यम से किया जाता है।
- निपटान का आधार: परिचालन दिशानिर्देशों के तहत तय सूत्र के अनुसार, वास्तविक उपज की तुलना ‘निर्धारित सीमा उपज’ (Threshold Yield) से की जाती है। यदि उपज में कोई कमी नहीं पाई जाती, तो कोई दावा देय नहीं होता।
2. जिलावार एवं वर्षवार आंकड़ों का विवरण (2021-26)
हनुमानगढ़ जिला (कंपनी: AIC)
हनुमानगढ़ जिले में पिछले 5 वर्षों में किसानों ने कुल ₹318.23 करोड़ प्रीमियम दिया, जिसके मुकाबले ₹2,273.55 करोड़ के दावे दर्ज किए गए और ₹2,253.55 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है:
- 2021-22: किसान प्रीमियम ₹58.39 करोड़ | दावे ₹796.24 करोड़ | भुगतान ₹791.51 करोड़
- 2022-23: किसान प्रीमियम ₹50.67 करोड़ | दावे ₹637.65 करोड़ | भुगतान ₹633.73 करोड़
- 2023-24: किसान प्रीमियम ₹68.96 करोड़ | दावे ₹401.26 करोड़ | भुगतान ₹396.26 करोड़
- 2024-25: किसान प्रीमियम ₹70.06 करोड़ | दावे ₹328.64 करोड़ | भुगतान ₹324.37 करोड़
- 2025-26: किसान प्रीमियम ₹70.15 करोड़ | दावे ₹109.76 करोड़ | भुगतान ₹107.68 करोड़
- कुल: किसान प्रीमियम ₹318.23 करोड़ | रिपोर्ट दावे ₹2,273.55 करोड़ | कुल भुगतान ₹2,253.55 करोड़
गंगानगर जिला (कंपनी: AIC, SBI जनरल, क्षेमा जनरल)
गंगानगर जिले में पिछले 5 वर्षों में किसानों ने कुल ₹226.83 करोड़ प्रीमियम भरा, जिसके मुकाबले ₹898.00 करोड़ के दावे रिपोर्ट हुए और ₹840.05 करोड़ का निपटान हुआ:
- 2021-22: AIC (प्रीमियम ₹0.03 करोड़, दावे ₹0.005 करोड़) | SBI जनरल (प्रीमियम ₹39.04 करोड़, दावे ₹184.24 करोड़, भुगतान ₹183.78 करोड़)
- 2022-23: AIC (प्रीमियम ₹0.30 करोड़, दावे ₹2.34 करोड़, भुगतान ₹2.33 करोड़) | SBI जनरल (प्रीमियम ₹41.59 करोड़, दावे ₹130.04 करोड़, भुगतान ₹129.84 करोड़)
- 2023-24: AIC (प्रीमियम ₹0.06 करोड़, दावे ₹0.41 करोड़, भुगतान ₹0.41 करोड़) | क्षेमा जनरल (प्रीमियम ₹49.61 करोड़, दावे ₹293.16 करोड़, भुगतान ₹292.05 करोड़)
- 2024-25: AIC (प्रीमियम ₹0.10 करोड़) | क्षेमा जनरल (प्रीमियम ₹56.93 करोड़, दावे ₹261.09 करोड़, भुगतान ₹209.53 करोड़)
- 2025-26: AIC (प्रीमियम ₹0.07 करोड़) | क्षेमा जनरल (प्रीमियम ₹39.10 करोड़, दावे ₹26.72 करोड़, भुगतान ₹22.11 करोड़)
- कुल: किसान प्रीमियम ₹226.83 करोड़ | रिपोर्ट दावे ₹898.00 करोड़ | कुल भुगतान ₹840.05 करोड़
3. पारदर्शिता और डिजिटल नवाचार
- CCE Agri App: खरीफ 2025 से ऐप द्वारा डिजिटल फसल कटाई प्रयोग (CCE) अनिवार्य किया गया है। वर्ष 2025-26 में राजस्थान में लगभग 93% CCE इसी ऐप के माध्यम से पूरे किए गए। कृषि व राजस्व विभाग के अधिकारी इसकी भौतिक पुष्टि भी करते हैं।
- यस-टेक (YES-TECH): उपग्रह तकनीक आधारित उपज अनुमान प्रणाली को खरीफ 2023 से लागू किया गया है। इसमें 30% अनिवार्य वेटेज तकनीक-आधारित उपज को दिया जाता है। राजस्थान ने 2025-26 में इसे सफलतापूर्वक लागू किया।
- CLAP ऐप (Crop Loss Assessment App): यह एक डिजिटल मोबाइल ऐप है जिसका उपयोग व्यक्तिगत भू-खंडों में स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद के नुकसान का सटीक व त्वरित आकलन करने के लिए सभी राज्यों/UTs में अनिवार्य कर दिया गया है।
4. लंबित दावों के कारण एवं 12% विलंब दंड का नियम
- विलंब के कारण: गंगानगर और हनुमानगढ़ में बीमा दावों में देरी के दो मुख्य कारण पाए गए — (1) नामांकित किसानों के बैंक खातों के विवरण का सत्यापित न होना, और (2) राज्य सरकार की ओर से बकाया सब्सिडी का लंबित रहना।
- 21 दिनों की सीमा और 12% पेनल्टी: राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) पर दावों की गणना और प्रीमियम सब्सिडी प्राप्त होने के 21 दिनों के भीतर बीमा कंपनियों को भुगतान करना अनिवार्य है। खरीफ 2024 से नियम लागू किया गया है कि यदि 21 दिनों की सीमा में भुगतान नहीं होता है, तो NCIP द्वारा स्वतः 12% वार्षिक दर से जुर्माना (ब्याज) की गणना कर विलंबित राशि के साथ दिया जाएगा।