राजस्थान हाई कोर्ट में आज एसआई भर्ती घोटाले पर अहम सुनवाई: सरकार का जवाब या अदालत का फैसला!
Edited By: गौरव कोचर
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 15, 2025
जयपुर, 15 मई 2025:
राजस्थान की बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा-2021 पर आज का दिन निर्णायक साबित हो सकता है। राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर बेंच इस बात पर फैसला सुना सकती है कि यह भर्ती रद्द होगी या नहीं। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में राज्य सरकार को 15 मई तक अंतिम मौका देते हुए स्पष्ट किया था कि यदि सरकार जवाब नहीं देती, तो अदालत स्वयं निर्णय लेगी।
क्या था मामला?
2021 में राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर के कुल 859 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। लेकिन जल्द ही परीक्षा में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोप लगे। जांच का जिम्मा स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) को सौंपा गया, जिसने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिनमें कुछ ट्रेनी SI भी शामिल हैं।
हाई कोर्ट की सख्ती
पिछली सुनवाई में अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) विज्ञान शाह ने अदालत को बताया था कि 21 फरवरी को दिए गए निर्देश के बावजूद कोई निर्णय नहीं लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि 13 मई को कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक हुई है और सरकार को थोड़ा और समय चाहिए। लेकिन जस्टिस समीर जैन ने साफ कर दिया कि यह सरकार को आखिरी मौका है और 15 मई के बाद अदालत स्वयं फैसला करेगी।
ED की एंट्री: आर्थिक गड़बड़ी की जांच
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) आर.डी. रस्तोगी ने अदालत को बताया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी इस मामले की जांच शुरू कर दी है और ECIR दर्ज कर ली है। PMLA कोर्ट ने प्रमुख आरोपियों हर्षवर्धन मीना और राजेंद्र यादव से पूछताछ की अनुमति भी दे दी है।
फील्ड पोस्टिंग अब भी ठप
हाई कोर्ट के निर्देश के बाद, 18 नवंबर, 6 जनवरी और 9 जनवरी को भर्ती प्रक्रिया पर ‘यथास्थिति बनाए रखने’ के आदेश दिए गए थे। इसके बाद 10 जनवरी को पुलिस मुख्यालय ने फील्ड ट्रेनिंग पर पूरी तरह रोक लगा दी थी, जो अब भी प्रभाव में है।
क्यों उठ रही है भर्ती रद्द करने की मांग?
याचिकाकर्ताओं के वकील हरेंद्र नील का कहना है कि SOG की जांच, पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट और कैबिनेट सब-कमेटी की सिफारिशें यह दर्शाती हैं कि परीक्षा में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी हुई है। इसी आधार पर भर्ती को पूरी तरह रद्द करने की मांग की गई है।
ट्रेनी SI की पीड़ा: “निर्दोष को क्यों सजा?”
दूसरी ओर, भर्ती के तहत चयनित ट्रेनी SI खुद को निर्दोष बता रहे हैं। उनका कहना है, “हमने परीक्षा में पूरी ईमानदारी से भाग लिया। हममें से कई ने अन्य सरकारी नौकरियां छोड़ दीं। अब भर्ती रद्द करना हमारे साथ अन्याय होगा।”
अब सभी की निगाहें राजस्थान हाई कोर्ट पर हैं। अगर सरकार आज कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाती, तो अदालत स्वयं भर्ती रद्द करने या जारी रखने पर फैसला सुना सकती है। यह फैसला ना केवल 859 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को तय करेगा, बल्कि आने वाले समय में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता और प्रक्रिया पर भी बड़ा प्रभाव डालेगा।