| नरेश गुनानी
जयपुर, 6 मार्च। राजस्थान में सूक्ष्म और लघु उद्योगों (MSEs) के आर्थिक हितों की रक्षा और उनके लंबित भुगतानों के त्वरित निस्तारण के लिए राज्य सरकार सक्रियता से कार्य कर रही है। इसी क्रम में शुक्रवार को उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त सुरेश ओला की अध्यक्षता में ‘सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद—प्रथम’ की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में कुल 37.44 करोड़ रुपये के 17 लंबित प्रकरणों पर गहन सुनवाई की गई।
तीन माह की उपलब्धियाँ: 187 प्रकरणों का हुआ निस्तारण
आयुक्त सुरेश ओला ने बताया कि पिछले तीन महीनों में राज्य की विभिन्न सुविधा परिषदों ने तत्परता दिखाते हुए कुल 35 बैठकों का आयोजन किया है। इन बैठकों का लेखा-जोखा इस प्रकार है:
- कुल सुनवाई: 342 करोड़ रुपये मूल्य के 870 प्रकरणों पर विचार किया गया।
- सफल निस्तारण: लगभग 47.48 करोड़ रुपये के 187 प्रकरणों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर लघु उद्यमियों को बड़ी राहत प्रदान की गई।
- मुख्यालय की भूमिका: अकेले सुविधा परिषद मुख्यालय—प्रथम द्वारा पिछले 3 माह में 6 बैठकें की गईं, जिनमें 290.89 करोड़ रुपये के 93 मामलों की समीक्षा हुई।
राजस्थान में परिषदों का ढांचा: 14 स्तरों पर समाधान
एमएसएमईडी (MSMED) अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत राजस्थान में वर्तमान में कुल 14 सुविधा परिषदें कार्यरत हैं, जिन्हें राशि के आधार पर वर्गीकृत किया गया है:
|
परिषद का स्तर |
अध्यक्षता |
प्रकरण की सीमा (राशि) |
|---|---|---|
|
राज्य स्तरीय (प्रथम) |
आयुक्त, उद्योग एवं वाणिज्य |
75 लाख रुपये से अधिक |
|
राज्य स्तरीय (द्वितीय) |
वरिष्ठ अतिरिक्त निदेशक |
25 लाख से 75 लाख रुपये तक |
|
संभाग स्तरीय |
संबंधित संभागीय अधिकारी |
25 |
कार्यभार की अधिकता को देखते हुए अकेले जयपुर संभाग में 6 परिषदें स्थापित की गई हैं, जबकि अन्य संभागों में 1-1 परिषद संचालित है।
डिजिटल समाधान: ओडीआर (ODR) पोर्टल की सुविधा
सूक्ष्म एवं लघु उद्यमी अब अपने लंबित भुगतानों के लिए भटकने के बजाय सीधे ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं।
- यह पोर्टल ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल समाधान सुनिश्चित करता है।
- पोर्टल पर जानकारी अपलोड होते ही सिस्टम राशि और भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर संबंधित परिषद को मामला स्वतः स्थानांतरित कर देता है।
