नरेश गुनानी
जयपुर, 22 जून। राजस्थान सरकार ने प्रदेश में ‘ईज ऑफ लिविंग’ (सुगम जीवन) और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यवसाय सुगमता) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कानूनों व प्रक्रियाओं के सरलीकरण और उन्हें आधुनिक दौर के अनुरूप प्रासंगिक बनाने के अभियान के तहत यह निर्णय लिया गया है।
डी-रेगुलेशन एंड कम्प्लायंस बर्डन रिडक्शन (विनियमन का सरलीकरण और अनुपालन बोझ में कमी) तथा जन विश्वास अधिनियम, 2026 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ‘राजस्थान विधिक माप विज्ञान (प्रवर्तन) नियम, 2011’ में महत्वपूर्ण संशोधनों का प्रारूप तैयार किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य व्यापारियों और उद्यमियों पर से कागजी कार्रवाई का बोझ कम करना और नियामकीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी व सरल बनाना है।
प्रस्तावित संशोधनों के प्रमुख बिंदु:
प्रस्तावित ड्राफ्ट में व्यापार जगत को राहत देने और व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कई क्रांतिकारी बदलाव शामिल किए गए हैं:
- लाइसेंस राज से मुक्ति: निर्माताओं, मरम्मतकर्ताओं (रिपेयरर्स) और विक्रेताओं के लिए अब तक अनिवार्य लाइसेंस व्यवस्था के स्थान पर स्व-घोषणा (Self-Declaration) आधारित पंजीकरण प्रमाण-पत्र की नई व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।
- नवीनीकरण की झंझट खत्म: व्यापारियों को हर कुछ समय में लाइसेंस नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराने की अनिवार्यता से पूरी तरह मुक्त करने का प्रस्ताव है।
- निजी-सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा: सत्यापन और मुद्रांकन (वेरिफिकेशन एंड स्टैम्पिंग) की प्रक्रिया को गति देने के लिए अब सरकारी अनुमोदित परीक्षण केंद्रों (GATCs) को भी इस कार्य में सम्मिलित किया जाएगा।
- शुल्क का युक्तिकरण: विधिक माप विज्ञान से जुड़े सत्यापन शुल्क का नए सिरे से युक्तिसंगत पुनर्निर्धारण किया जाएगा, जिससे अनावश्यक वित्तीय बोझ न पड़े।
- शमन शुल्क में आनुपातिक बदलाव: नियमों का उल्लंघन होने पर अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से तार्किक और आनुपातिक शमन (कॉम्पाउंडिंग) शुल्क निर्धारित करने का प्रावधान है।
7 दिनों के भीतर दे सकते हैं सुझाव और आपत्तियां
राज्य सरकार ने इन प्रारूप नियमों (ड्राफ्ट रूल्स) को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में प्रदेश के सभी व्यापारिक संगठनों, उद्योग संघों, उपभोक्ता मंचों, विशेषज्ञों और आम जनता से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं।
कैसे और कहां भेजें सुझाव?
कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था इन प्रारूप नियमों के राजस्थान राजपत्र (गजट) में प्रकाशित होने की तिथि से 7 दिवस के भीतर अपने सुझाव अथवा आपत्तियां ई-मेल के माध्यम से भेज सकते हैं।
- ई-मेल आईडी: dclm.hq1@rajasthan.gov.in तथा secy-food-rj@nic.in
정 सरकार ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित 7 दिनों की समयावधि के बाद प्राप्त होने वाले किसी भी सुझाव या आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। ऐसे में संबंधित संगठन और उद्यमी जल्द से जल्द ड्राफ्ट का अध्ययन कर अपनी प्रतिक्रियाएं भेज सकते हैं।