जयपुर/ नरेश गुनानी/राजस्थान विधान सभा में सोमवार को पूर्व विधान सभा अध्यक्ष स्व. रामनिवास मिर्धा की जयंती पर सादगीपूर्ण एवं गरिमामय कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। विधान सभा परिसर में उपस्थित गणमान्य अतिथियों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम के दौरान राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्व. रामनिवास मिर्धा के संसदीय जीवन और प्रदेश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करने में उनके ऐतिहासिक योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्व. मिर्धा ने सदन की गरिमा, उच्च मर्यादाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए असाधारण कार्य किए, जो आज भी संसदीय परंपराओं के लिए एक आदर्श मार्गदर्शक हैं।
संसदीय परंपराओं में उल्लेखनीय योगदान:
- दीर्घकालिक नेतृत्व: स्व. रामनिवास मिर्धा अप्रैल 1957 से मार्च 1962 तक तथा पुनः मार्च 1962 से मई 1967 तक दो कार्यकालों के लिए राजस्थान विधान सभा के अध्यक्ष रहे।
- सदन की मर्यादा: अपने अध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान उन्होंने निष्पक्षता, सदन संचालन की शुचिता और विधायी विमर्श के उच्च मानक स्थापित किए।
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विधान सभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा सहित सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी स्व. मिर्धा के चित्र पर पुष्प अर्पित किए तथा उनके द्वारा स्थापित समृद्ध परंपराओं का स्मरण किया।