राजस्थान विधानसभा में पश्चिम बंगाल अध्यक्ष रथीन्द्र बोस का दौरा: वासुदेव देवनानी के साथ संसदीय परंपराओं और नवाचारों पर हुई विस्तृत चर्चा

जयपुर/ नरेश गुनानी/26 जुलाई 2026 — राजस्थान विधानसभा में रविवार को एक प्रमुख विधायी एवं शिष्टाचार बैठक देखने को मिली, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथीन्द्र बोस ने जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा भवन का दौरा किया। इस दौरान राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने उनका आत्मीय स्वागत किया और दोनों शीर्ष संसदीय पदाधिकारियों के बीच विधान मंडलों के संचालन तथा नवाचारों पर विस्तार से बातचीत हुई।

​प्रमुख गतिविधियां और भ्रमण

  • राजनीतिक आख्यान संग्रहालय का अवलोकन: वासुदेव देवनानी ने रथीन्द्र बोस को विधानसभा परिसर में स्थित अत्याधुनिक राजनीतिक आख्यान संग्रहालय का भ्रमण कराया। उन्होंने संग्रहालय की विभिन्न दीर्घाओं के माध्यम से राजस्थान के राजनीतिक इतिहास, लोकतांत्रिक विकास, स्वतंत्रता आंदोलन, रियासतों के एकीकरण और विधानसभा की गठन यात्रा की जानकारी दी। रथीन्द्र बोस ने संग्रहालय में आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित ऐतिहासिक विरासत की सराहना की।
  • सदन एवं भवन परिसर का निरीक्षण: पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष को राजस्थान विधानसभा के विशाल भवन और सदन का अवलोकन कराया गया। इस दौरान उन्हें सदन की कार्यप्रणाली, स्थापित विधायी परंपराओं और विभिन्न गतिविधियों से अवगत कराया गया।

​संसदीय विषयों पर संवाद और नवाचारों की सराहना

​बैठक के दौरान दोनों राज्यों के अध्यक्षों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं को सशक्त बनाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया:

  • अनुभवों का आदान-प्रदान: दोनों अध्यक्षों ने राज्यों की विधानसभाओं के बीच परस्पर संवाद बढ़ाने, संसदीय परंपराओं के आदान-प्रदान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की।
  • कारगिल शौर्य वाटिका को बताया अभिनव पहल: रथीन्द्र बोस ने राजस्थान विधानसभा परिसर की व्यवस्थाओं और संग्रहालय के साथ-साथ परिसर में शहीदों की स्मृति में स्थापित ‘कारगिल शौर्य वाटिका’ की विशेष रूप से प्रशंसा की और इसे एक अनुकरणीय कदम बताया।

​महाराणा प्रताप की प्रतिमा और स्मृति चिह्न भेंट

​मुलाकात के अंत में वासुदेव देवनानी ने रथीन्द्र बोस को राजस्थान के स्वाभिमान एवं गौरव के प्रतीक महाराणा प्रताप की प्रतिमा भेंट की। इसके अलावा उन्हें राजस्थान विधानसभा का प्रतीक चिह्न, विधानसभा डायरी, नियमावली, विधायी साहित्य तथा राजस्थान के पारंपरिक मिष्ठान भी उपहार स्वरूप प्रदान किए गए।

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