जयपुर/ नरेश गुनानी/राज्य वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग ने कर चोरी पर अंकुश लगाने और राजस्व संरक्षण के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जिलों में व्यापक अभियान चलाया। वाणिज्यिक कर विभाग की विशेष टीमों ने 21 और 22 अगस्त को अजमेर, जोधपुर, डीडवाना–कुचामन और कोटपूतली–बहरोड़ जिलों में स्थित पांच प्रमुख व्यापारिक प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया।
इस जांच कार्रवाई के दौरान अघोषित स्टॉक, टर्नओवर छिपाने, अपात्र इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का दावा करने और बिना उचित बिलिंग के कारोबार संचालन जैसी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं। सभी मामलों को मिलाकर कुल 66.95 लाख रुपये की संभावित कर देयता चिह्नित की गई, जिसमें से संबंधित फर्मों ने 65.95 लाख रुपये की राशि स्वेच्छा से सरकारी खाते में जमा करवा दी है।
प्रतिष्ठानवार कार्रवाई एवं मुख्य बिंदु
- अजमेर (नीरज सेल्स कॉरपोरेट और यूनिक बाथकेयर): सैनिटरीवेयर और बाथकेयर उत्पादों का कारोबार करने वाले इन दोनों प्रतिष्ठानों के सर्वे में घोषित रिकॉर्ड से कहीं अधिक वास्तविक स्टॉक पाया गया। कच्चे रजिस्टर, लूज पेपर और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए हैं। दोनों मामलों में लगभग 20-20 लाख रुपये की कर देयता आंकी गई। इनमें नीरज सेल्स कॉरपोरेट ने 10 लाख रुपये और यूनिक बाथकेयर ने 5 लाख रुपये इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर के जरिए जमा किए।
- जोधपुर (बीआरएस कंस्ट्रक्शन कंपनी): निर्माण कार्य से जुड़ी इस फर्म की प्रारंभिक जांच में सामने आया कि उसने शुरुआत से रद्द चल रही एक फर्जी फर्म से 8.46 लाख रुपये का अपात्र आईटीसी लिया था। फर्म पर कुल लगभग 12 लाख रुपये की कर देयता आंकी गई है।
- मकराना, डीडवाना-कुचामन (सर्वेश्वर ट्रेडिंग कंपनी): प्लाईवुड, टिम्बर और लैमिनेटेड वुड के कारोबार से जुड़े इस संस्थान में बिना उचित बिलिंग के खरीद-बिक्री और आईटीसी समायोजन के साक्ष्य मिले। 12 लाख रुपये की संभावित देयता के मुकाबले फर्म ने 5 लाख रुपये जमा करवाए हैं।
- कोटपूतली-बहरोड़ (रानीपुरा सोलर प्राइवेट लिमिटेड): नीमराना स्थित सोलर कंपनी के मामले में विभागीय पोर्टल विश्लेषण और फील्ड इनपुट के आधार पर निर्माण गतिविधियों के लिए प्रतिबंधित आईटीसी का उपयोग पकड़ा गया। सत्यापन के बाद कंपनी ने 45 लाख 95 हजार 987 रुपये की राशि स्वेच्छा से जमा कर दी।
विभाग का सख्त रुख
वाणिज्यिक कर विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई निष्पक्ष और पारदर्शी व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए की गई है। विभाग डेटा एनालिटिक्स, बीओ-वेब पोर्टल और फील्ड इंटेलिजेंस के जरिए बिना बिल व्यापार करने वालों, फर्जी आईटीसी क्लेम करने वालों और अघोषित स्टॉक रखने वाली फर्मों पर लगातार नजर रख रहा है। शेष मामलों में जब्त दस्तावेजों की विस्तृत जांच के बाद आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।