हरि प्रसाद शर्मा
जयपुर/अजमेर। राजस्थान के राजस्व न्यायालयों में न्याय की प्रतीक्षा कर रहे लाखों लोगों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार ने प्रदेश की करीब 1700 राजस्व अदालतों में लंबित सवा सात लाख से अधिक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए नए वित्तीय वर्ष (2026-27) से विशेष कार्ययोजना लागू की है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब राजस्व अधिकारियों को अनिवार्य रूप से प्रतिदिन 4 घंटे न्यायिक कार्य करना होगा।
नए वित्तीय वर्ष में नई व्यवस्था: 10 से 2 बजे तक चलेगी अदालत
मुख्य सचिव द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, तहसील से लेकर संभाग स्तर तक के सभी राजस्व न्यायालयों में अब सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक का समय केवल सुनवाई के लिए आरक्षित रहेगा। इस दौरान अधिकारियों को अनिवार्य रूप से अपनी कुर्सी पर मौजूद रहकर मुकदमों का निपटारा करना होगा। अक्सर यह देखा गया है कि प्रशासनिक कार्यों की व्यस्तता के चलते अधिकारी न्यायालय नहीं बैठ पाते थे, जिससे पेंडेंसी बढ़ती जा रही थी। अब इस पर नकेल कस दी गई है।
पेंडेंसी का डरावना आंकड़ा: 10 लाख में से 7.5 लाख मामले लंबित
प्रदेश के राजस्व न्यायालयों की वर्तमान स्थिति काफी चिंताजनक है:
- कुल पंजीकृत मामले: लगभग 10 लाख से अधिक।
- लंबित (पेंडिंग) मामले: साढ़े 7 लाख से ज्यादा।
- SDO कोर्ट का हाल: सर्वाधिक 5 लाख 77 हजार मामले उपखंड अधिकारी न्यायालयों में लंबित हैं।
- राजस्व मंडल (रेवेन्यू बोर्ड): दूसरे नंबर पर सर्वाधिक सवा लाख मामले यहां पेंडिंग हैं।
- पुराने मामले: करीब 83% (4 लाख) मामले एक वर्ष से अधिक पुराने हैं, जबकि 10% मामले एक साल के भीतर के हैं।
लंबित मुकदमों में अधिकांश मामले नामांतरण (दाखिल-खारिज), भूमि के मालिकाना हक की घोषणा और जमीन बंटवारे से संबंधित हैं।
3 साल पुराने मामलों पर विशेष फोकस
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 3 साल से अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाए। उपखंड अधिकारियों (SDO) और सहायक कलेक्टरों को 1 अप्रैल 2026 तक के 100 सबसे पुराने मुकदमों की सूची तैयार कर उन्हें चालू वित्तीय वर्ष में हर हाल में निस्तारित करने का लक्ष्य दिया गया है। नोटिस तामील की प्रक्रिया में देरी को रोकने के लिए अब समाचार पत्रों में प्रकाशन का सहारा भी लिया जा सकेगा।
लापरवाही पर होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
राजस्व मंडल को इन सुधारों की कड़ी निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। संभागीय आयुक्तों और जिला कलेक्टरों को पाबंद किया गया है कि वे नियमित निरीक्षण करें और रिपोर्ट मंडल को भेजें। मुख्य सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि पुराने मामलों में रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया या सुनवाई में टालमटोल की गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
देरी के प्रमुख कारण और समाधान
सरकार ने माना है कि अधिकारियों की कमी, तकनीकी संसाधनों का अभाव और बार-बार होने वाले तबादले पेंडेंसी के मुख्य कारण हैं। इससे निपटने के लिए अब ऑनलाइन केस मैनेजमेंट सिस्टम को और मजबूत किया जा रहा है और नियमित मासिक समीक्षा अनिवार्य कर दी गई है।
