हरिप्रसाद शर्मा/ब्यूरो रिपोर्ट, जयपुर
जयपुर। राजस्थान में एक बार फिर मौसम का मिजाज बदलने वाला है। उत्तर भारत में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर शुरू हो गया है। जयपुर मौसम विज्ञान केंद्र ने आगामी 31 मार्च तक राज्य में अलर्ट जारी किया है, जिससे तपती गर्मी से तो राहत मिलेगी, लेकिन किसानों की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
इन जिलों में ओलावृष्टि और बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, रविवार को प्रदेश के चार प्रमुख जिलों में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। विशेषकर:
- जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ में तेज गर्जना के साथ ओलावृष्टि होने की प्रबल संभावना है।
- बीकानेर संभाग और सीमावर्ती इलाकों में धूलभरी हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है।
- जयपुर, सीकर और कोटा संभाग में भी दोपहर बाद बादलों की आवाजाही के साथ तापमान में गिरावट आने के संकेत हैं।
पिछले 24 घंटों का हाल: गर्मी और धूलभरी हवाएं
शनिवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप के कारण गर्मी का असर देखा गया। हालांकि, शाम होते-होते बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के कुछ क्षेत्रों में मौसम ने करवट ली और हल्की बूंदाबांदी हुई।
- सबसे गर्म शहर: कोटा और चित्तौड़गढ़ में पारा 38.4 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा।
- राजधानी जयपुर: जयपुर में अधिकतम तापमान 34.9 डिग्री और न्यूनतम 21.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
प्रमुख शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
|
शहर |
अधिकतम तापमान |
न्यूनतम तापमान |
|---|---|---|
|
कोटा / चित्तौड़गढ़ |
38.4 |
21.8 / 21.0 |
|
बाड़मेर / जैसलमेर |
37.1 / 37.0 |
24.3 / 22.6 |
|
बीकानेर / चूरू |
36.2 / 36.4 |
22.2 / 17.4 |
|
अजमेर / उदयपुर |
34.3 / 35.1 |
19.4 / 20.4 |
|
जोधपुर / पाली |
36.0 / 34.2 |
21.2 / 18.0 |
|
सीकर / फतेहपुर |
34.0 / 35.0 |
15.5 / 14.9 |
अप्रैल के पहले सप्ताह में भी जारी रहेगा असर
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस सक्रिय मौसमी तंत्र का प्रभाव केवल मार्च के अंत तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अप्रैल के पहले सप्ताह में भी इसके असर से प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं। इससे फिलहाल लू और भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
अचानक आए इस बदलाव के कारण कृषि विभाग ने किसानों को कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है, ताकि ओलावृष्टि और बारिश से नुकसान को कम किया जा सके।
