राजस्थान मौसम अपडेट: पाकिस्तान बॉर्डर से उठा रेत का तूफान, कई जिलों में बदला मौसम; 15 मई से हीटवेव का नया अलर्ट
Edited By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 14, 2025
जयपुर।राजस्थान में बीते दो हफ्तों से सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के चलते गर्मी से राहत मिल रही थी, लेकिन अब मौसम एक बार फिर करवट लेता दिख रहा है। बुधवार को राज्य के कई जिलों में तेज आंधी, रेत के तूफान और बारिश के कारण मौसम में बड़ा बदलाव देखा गया। कोटा, उदयपुर, बीकानेर और श्रीगंगानगर समेत कई इलाकों में तेज हवाओं और रेत के बवंडर ने लोगों को चौंका दिया।
पाकिस्तान बॉर्डर से उठा रेत का भयानक तूफान
बीकानेर और श्रीगंगानगर जिलों में पाकिस्तान की सीमा की ओर से उठे रेत के तूफान ने पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया। तेज धूल भरी हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिर गए, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हुई। हालांकि राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं मिली।
बारिश ने दिलाई गर्मी से राहत
तेज आंधी के बाद कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट आई और लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिली। खासकर बीकानेर, श्रीगंगानगर, उदयपुर और कोटा में बारिश ने मौसम को सुहाना बना दिया। उदयपुर में दोपहर बाद अचानक तेज हवाएं चलीं और मूसलाधार बारिश हुई, जिससे तापमान में अच्छी गिरावट दर्ज की गई।
हीटवेव की वापसी: 15 मई से नया दौर
मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि 15 मई से राजस्थान के कई इलाकों में हीटवेव का नया दौर शुरू हो सकता है।
- जोधपुर और बीकानेर संभाग के सीमावर्ती क्षेत्रों में 30-40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सतही धूल भरी हवाएं चल सकती हैं।
- तापमान में 2-3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की संभावना है।
- बीकानेर और श्रीगंगानगर में 15 से 17 मई के बीच अधिकतम तापमान 44-45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
पूर्वी राजस्थान में रहेगा मौसम शुष्क
पूर्वी राजस्थान में 15 मई से मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है, हालांकि कोटा और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में दोपहर बाद हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। राज्य के अन्य हिस्सों में गर्मी का प्रकोप बढ़ेगा और तापमान में बढ़ोतरी होगी।
मौसम विभाग की सलाह
लोगों को सलाह दी गई है कि हीटवेव के दौरान अत्यधिक धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करें। किसान भी मौसम की जानकारी के अनुसार फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

