राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जीवाड़े का महाखुलासा: SOG की बड़ी स्ट्राइक, पूर्व रजिस्ट्रार सहित 18 गिरफ्तार

राजस्थान मेडिकल काउंसिल में फर्जीवाड़े का महाखुलासा: SOG की बड़ी स्ट्राइक, पूर्व रजिस्ट्रार सहित 18 गिरफ्तार

|  हरि प्रसाद शर्मा

अजमेर/जयपुर। राजस्थान के चिकित्सा क्षेत्र में हड़कंप मचा देने वाले FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन) फर्जी सर्टिफिकेट मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने बुधवार को निर्णायक कार्रवाई की है। SOG ने राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) के पूर्व रजिस्ट्रार डॉ. राजेश शर्मा सहित कुल 18 आरोपियों को गिरफ्तार कर चिकित्सा जगत में व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों पर प्रहार किया है।

​बिना योग्यता के बन गए ‘डॉक्टर’

​इस पूरे घोटाले का केंद्र वे लोग हैं, जिन्होंने न तो विदेश में चिकित्सा की पढ़ाई पूरी की और न ही नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (NBE) द्वारा आयोजित अनिवार्य FMGE परीक्षा पास की। इसके बावजूद, RMC के अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी एनओसी, जाली सर्टिफिकेट और कूटरचित ई-मेल के जरिए इन अयोग्य लोगों को डॉक्टर के रूप में पंजीकृत (Registration) कर दिया गया।

​SOG की प्रदेशव्यापी दबिश और एडीजी का खुलासा

​SOG के एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि डीआईजी पारिश देशमुख के नेतृत्व में गठित विशेष टीमों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में एक साथ दबिश दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में मामले का खुलासा करते हुए उन्होंने बताया कि जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:

  • जाली ई-मेल का खेल: काउंसिल ने बिना किसी भौतिक सत्यापन के, केवल जाली ई-मेल को रिकॉर्ड में शामिल कर रजिस्ट्रेशन जारी कर दिए।
  • 98 संदिग्ध पंजीकरण: मीडिया रिपोर्ट्स और प्राथमिक जांच के अनुसार, करीब 98 ऐसे ‘फर्जी डॉक्टरों’ का पंजीकरण किया गया, जिनके पास कोई वैध शैक्षणिक आधार नहीं था।

​मंत्री की सख्ती और जांच कमेटी की रिपोर्ट

​उल्लेखनीय है कि इस महाघोटाले की गंभीरता को देखते हुए 1 अक्टूबर 2024 को चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने 5 सदस्यीय उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी की अंतरिम रिपोर्ट में व्यापक अनियमितताएं पाए जाने के बाद डॉ. राजेश शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया था। अब SOG की इस कार्रवाई ने मामले के आपराधिक पहलुओं को उजागर कर दिया है।

​बीआरसी गैंग से लेकर फर्जी डॉक्टर तक: जीरो टॉलरेंस

​राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा संगठित अपराध और फर्जीवाड़े के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जा रही है। इस मामले में अब उन लोगों की भी तलाश की जा रही है, जिन्होंने इन फर्जी डिग्री धारकों से इलाज करवाया या जो इस सिंडिकेट के लिए बिचौलिए का काम कर रहे थे।

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