राजस्थान में सौर ऊर्जा क्रांति: पीएम-कुसुम योजना से अन्नदाता बन रहा ‘ऊर्जादाता’
| नरेश गुनानी
जयपुर, 27 मार्च 2026 मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की महत्वाकांक्षी पीएम-कुसुम योजना प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को बदलने का माध्यम बन गई है। ग्रिड कनेक्टेड सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से न केवल किसानों को दिन में बिजली मिल रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उद्यमिता के एक नए युग का सूत्रपात हुआ है।
उपलब्धियों के आंकड़े: दो वर्षों में भारी उछाल
राज्य सरकार के वर्तमान कार्यकाल में सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना में अभूतपूर्व तेजी आई है। पिछले दो वर्ष और तीन माह की अल्पावधि में प्रदेश की ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:
- कुल स्थापित क्षमता: 3,585 मेगावाट (1,617 संयंत्र)।
- वर्तमान सरकार का योगदान: कुल क्षमता में से 3,462 मेगावाट के 1,525 संयंत्र इसी कार्यकाल में स्थापित किए गए हैं।
- दैनिक प्रगति: प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 3 से 4 नए प्लांट लग रहे हैं, जिससे प्रतिदिन 10 मेगावाट अतिरिक्त क्षमता ग्रिड से जुड़ रही है।
कुसुम कंपोनेंट-ए में राजस्थान देश में अव्वल
राजस्थान ने इस योजना के विभिन्न घटकों में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है:
- कंपोनेंट-ए (प्रथम स्थान): इसमें 686 मेगावाट के 496 संयंत्र स्थापित हो चुके हैं। अकेले बीकानेर जिले में सर्वाधिक 86 प्लांट लगे हैं।
- कंपोनेंट-सी (द्वितीय स्थान): इसमें 2,899 मेगावाट के 1,121 प्लांट लग चुके हैं। फलौदी, जोधपुर और बीकानेर जिलों ने इसमें अग्रणी भूमिका निभाई है।
- राष्ट्रीय सम्मान: फीडर लेवल सोलराइजेशन में श्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने इसी वर्ष जनवरी में राजस्थान डिस्कॉम्स को ‘गोल्ड अवॉर्ड’ से सम्मानित किया था।
राम नवमी पर 12 नए संयंत्रों की सौगात
पावन अवसर पर राजस्थान डिस्कॉम्स ने 23.60 मेगावाट क्षमता के 12 नए सौर ऊर्जा संयंत्र ग्रिड से जोड़े हैं।
- क्षेत्र: जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम में 4-4 संयंत्र।
- लाभार्थी: इन संयंत्रों से बूंदी, अलवर, नागौर, सीकर और बीकानेर जैसे जिलों के 2 हजार से अधिक किसानों को अब सिंचाई के लिए दिन में बिजली मिल सकेगी।
किसानों के जीवन में बदलाव: संकल्प से सिद्धि
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का संकल्प है कि वर्ष 2027 तक प्रदेश के हर किसान को सिंचाई के लिए दिन में बिजली उपलब्ध कराई जाए।
- सस्ता और प्रदूषण मुक्त: कोयले पर निर्भरता कम होने से किसानों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिल रही है।
- आय का स्रोत: 1,000 से अधिक नए सौर उद्यमी इस योजना से जुड़ चुके हैं। किसान अपनी अनुपजाऊ भूमि पर प्लांट लगाकर या लीज पर देकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
- तकनीकी लाभ: बिजली का उत्पादन और खपत एक ही सब-वे स्टेशन के दायरे में होने से ट्रांसमिशन लॉस (बिजली छीजत) न्यूनतम हो गई है।
योजना की पात्रता और प्रक्रिया
पीएम-कुसुम योजना के तहत 33 केवी ग्रिड सब-स्टेशन के 5 किलोमीटर के दायरे में किसान या सहकारी समितियां स्वयं की या लीज पर ली गई भूमि पर अधिकतम 5 मेगावाट तक का सोलर प्लांट लगा सकते हैं। विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम) पावर परचेज एग्रीमेंट के माध्यम से यह बिजली निर्धारित दरों पर खरीदते हैं। अकेले फरवरी माह में डिस्कॉम को 4,000 लाख यूनिट से अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त हुई है।
