जयपुर, 27 जून 2026/ नरेश गुनानी/राजस्थान में नौनिहालों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए 28 जून से 30 जून तक राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान चलाया जा रहा है। इस तीन दिवसीय अभियान के तहत प्रदेश के 1.04 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो रोधी खुराक पिलाई जाएगी। अभियान को पूरी तरह सफल बनाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने शनिवार को अभियान की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि अभियान के पहले दिन (28 जून) 5 वर्ष तक की आयु के बच्चों को निर्धारित बूथों पर दवा पिलाई जाएगी। इसके बाद अगले दो दिन स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों को खुराक पिलाएंगी, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा इस सुरक्षा चक्र से वंचित न रहे।
59 हजार से अधिक बूथ और 75 हजार टीमें मुस्तैद
प्रदेशभर में बच्चों तक पहुंच आसान बनाने के लिए एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है:
- कुल पोलियो बूथ: 59,217 बूथ स्थापित किए गए हैं।
- गठित टीमें: कुल 75,232 टीमें मुस्तैद रहेंगी।
- विशेष टीमें: आवागमन वाले क्षेत्रों के लिए 7,011 ट्रांजिट टीमें और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए 9,004 मोबाइल टीमें तैनात की गई हैं।
- मानव संसाधन: अभियान में 1.38 लाख से अधिक स्वास्थ्य कर्मी, एएनएम, आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और अन्य विभागों के कार्मिक सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
अभिभावकों से बूथ पर आने की अपील
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने बताया कि पहले दिन शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बूथ स्तर पर सघन अभियान चलेगा। उन्होंने प्रदेश के सभी अभिभावकों से बेहद भावुक और जरूरी अपील करते हुए कहा कि वे जिम्मेदारी निभाते हुए अपने 5 वर्ष तक के बच्चों को नजदीकी बूथ पर ले जाएं और पोलियो की खुराक अवश्य पिलाएं।
घुमक्कड़ डेरों और ईंट-भट्टों पर विशेष नजर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डॉ. जोगाराम ने बताया कि इस बार रणनीति को और मजबूत किया गया है। मोबाइल और ट्रांजिट टीमों के माध्यम से बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, राष्ट्रीय राजमार्गों और मेलों जैसे सार्वजनिक स्थलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, घुमक्कड़ जनजाति के डेरों, ईंट-भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों और दुर्गम एवं दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को ढूंढकर दवा पिलाई जाएगी। अभियान में आईसीडीएस, आयुर्वेद विभाग और सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी सहयोग लिया जा रहा है।
अभियान की सांख्यिकी एक नजर में:
|
घटक |
आंकड़े |
|---|---|
|
लक्ष्य (कुल बच्चे) |
1.04 करोड़ से अधिक |
|
कुल स्थापित बूथ |
59,217 |
|
कुल टीमें (मोबाइल व ट्रांजिट सहित) |
75,232 |
|
सक्रिय स्वास्थ्य कर्मी व कार्मिक |
1.38 लाख से अधिक |
|
अभियान की अवधि |
28 जून से 30 जून 2026 |
पोलियो मुक्त भारत की गौरवशाली यात्रा और वैश्विक स्थिति
भारत में पल्स पोलियो अभियान की शुरुआत वर्ष 1995 में की गई थी। लगातार प्रयासों के चलते जनवरी 2011 के बाद से देश में पोलियो का एक भी नया मामला सामने नहीं आया है। इसी सफलता के आधार पर 27 मार्च 2014 को भारत को आधिकारिक तौर पर ‘पोलियो मुक्त’ घोषित कर दिया गया था।
वैश्विक चुनौती अभी भी बरकरार:
हालांकि भारत पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन पड़ोसी देशों में खतरा अब भी मौजूद है। वर्ष 2026 में अब तक पाकिस्तान में 3 और अफगानिस्तान में 4 पोलियो के नए मामले सामने आए हैं। यही कारण है कि भारत अपनी सुरक्षा को बनाए रखने के लिए हर वर्ष इस अभियान को पूरी सतर्कता और कड़ाई के साथ संचालित करता है।