राजस्थान में मौसम का यू-टर्न: भीषण गर्मी के बीच आंधी-बारिश का ‘येलो अलर्ट’, किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें

(हरिप्रसाद शर्मा) जयपुर। राजस्थान में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच मौसम ने अचानक करवट बदल ली है। मौसम विभाग ने प्रदेश के बड़े हिस्से में 6 मई 2026 तक आंधी, तेज हवाओं और गर्जना के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। प्रकृति के इस बदलते मिजाज ने जहां आम जनता को तपिश से मामूली राहत दी है, वहीं खेतों में खड़ी फसल को लेकर किसानों की धड़कनें तेज कर दी हैं।

इन जिलों में जारी हुआ अलर्ट

​मौसम विभाग के अनुसार, एक नए सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में मौसम बिगड़ने की संभावना है।

  • पूर्वी राजस्थान: जयपुर, अलवर, भरतपुर, दौसा, डीग, धौलपुर, झुंझुनू, करौली, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक और अजमेर।
  • पश्चिमी राजस्थान: बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर, फलौदी और श्रीगंगानगर। इन क्षेत्रों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी दी गई है।

पारा 44 डिग्री के पार, फिर भी मिलेगी आंशिक राहत

​मई की शुरुआत में ही राजस्थान के कई हिस्सों में पारा आसमान छू रहा है। हाल ही में बाड़मेर में अधिकतम तापमान 44.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकांश जिलों में यह 40 से 44 डिग्री के बीच बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि इस विक्षोभ के प्रभाव से आगामी दिनों में तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है, जिससे लू (Heatwave) का असर कम होगा।

दिन में तपन, शाम को तूफानी मिजाज

​मौसम का मिजाज काफी अस्थिर रहने वाला है। दिनभर सूरज की तीखी किरणों और उमस से लोग परेशान रहेंगे, वहीं दोपहर बाद या शाम के समय बादलों की आवाजाही शुरू होगी। धूल भरी आंधी और छितराई बारिश से शाम के समय वातावरण में ठंडक महसूस की जा सकेगी।

किसानों की बढ़ी मुसीबत

​मौसम के इस बदलाव ने सबसे ज्यादा चिंता किसानों की बढ़ाई है। इस समय कई क्षेत्रों में फसलें कटाई के अंतिम चरण में हैं या मंडियों में खुले में पड़ी हैं। तेज आंधी और बारिश से फसलों के भीगने और झड़ने की आशंका है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपनी उपज सुरक्षित स्थानों पर रखने की सलाह दी है।

​अब सबकी नजरें 6 मई तक के घटनाक्रम पर टिकी हैं कि क्या यह बारिश वाकई राहत की फुहार बनकर आएगी या किसानों के लिए आफत का कारण बनेगी।

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