नरेश गुनानी
राजस्थान इस समय मौसम के सबसे अनोखे दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां श्रीगंगानगर, जैसलमेर और बीकानेर जैसे सीमावर्ती जिलों में पारा 45 से 46 डिग्री सेल्सियस को छूकर आग उगल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर दी है।
एक नए और सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण राजस्थान के मौसम में अचानक बड़ा बदलाव (यू-टर्न) आने वाला है, जिससे तपती गर्मी से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
अंधड़ और बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’: 60-70 किमी/घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं
जयपुर मौसम केंद्र के मुताबिक, राज्य में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो चुका है। इसके प्रभाव से आगामी 2-3 दिनों तक राज्य के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी और हीटवेव से राहत मिलेगी।
- कहां दिखेगा असर: बीकानेर संभाग, शेखावाटी क्षेत्र (सीकर, झुंझुनू, चूरू), जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग के जिलों में मौसम तेजी से बदल रहा है।
- तूफानी हवाएं और ओलावृष्टि: विभाग ने चेतावनी जारी की है कि इस दौरान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूल भरी आंधी (अंधड़) चल सकती है। कुछ स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि होने की भी प्रबल संभावना है।
- तापमान में गिरावट: आंधी-बारिश के इस दौर से राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे पारा 40-43 डिग्री के आसपास आ जाएगा। हालांकि, हवा में नमी बढ़ने से उमस (Humid heat) थोड़ी परेशान कर सकती है।
राजस्थान में मानसून कब देगा दस्तक?
जहां एक तरफ प्री-मानसूनी आंधी और पश्चिमी विक्षोभ राहत दे रहे हैं, वहीं असली मानसून को लेकर राजस्थान के लिए थोड़ा इंतजार लंबा हो सकता है।
मानसून अपडेट:
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून देश के अन्य हिस्सों में आगे बढ़ रहा है, लेकिन राजस्थान में इसकी एंट्री में लगभग दो सप्ताह की देरी होने की संभावना है। राज्य में आमतौर पर मानसून जून के अंतिम सप्ताह (25 जून के बाद) या जुलाई के पहले सप्ताह में प्रवेश करता है। इस बार भी इसके जून के बिल्कुल आखिरी दिनों या जुलाई की शुरुआत में ही पहुंचने के आसार हैं।
मौसम विभाग की जरूरी सलाह (Advisory)
खराब मौसम और तेज अंधड़ को देखते हुए जयपुर मौसम केंद्र ने आम जनता के लिए गाइडलाइन जारी की है:
- आंधी और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे या कमजोर इमारतों (कच्चे मकानों) के पास शरण न लें।
- खराब मौसम के दौरान बिजली के उपकरणों के प्लग निकाल दें और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
- किसानों को सलाह दी गई है कि वे अपनी कटी हुई फसलों और मंडियों में पड़े अनाज को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें।