राजस्थान में प्राकृतिक खेती का नया अध्याय: 2.50 लाख किसानों को मिल रहा सीधा लाभ, लागत में कमी और आय में वृद्धि
जयपुर, 24 जनवरी 2026
| नरेश गुनानी
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार कृषि क्षेत्र को रसायन-मुक्त और टिकाऊ बनाने के लिए ‘प्राकृतिक खेती’ को बड़े स्तर पर प्रोत्साहन दे रही है। राज्य सरकार का लक्ष्य किसानों की खेती की लागत कम करना, मिट्टी की उर्वरता में सुधार करना और आमजन को शुद्ध उत्पाद उपलब्ध कराना है। इस मुहिम के तहत प्रदेश के 2 लाख 50 हजार किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जा रहा है।
बजट 2025-26: व्यापक कार्ययोजना और वित्तीय सहायता
सरकार ने प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए हैं:
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन: इसके तहत 2 लाख 25 हजार किसानों को लाभ दिया जा रहा है, जिसमें केंद्र और राज्य का हिस्सा 60:40 के अनुपात में है।
- राज्य स्तरीय पहल: अतिरिक्त 25 हजार किसानों को राज्य सरकार द्वारा शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।
- सीधा लाभ (DBT): चयनित किसानों को प्रति एकड़ 4 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे वे फार्म इनपुट इकाइयां स्थापित कर सकें।
क्लस्टर आधारित खेती और प्रशिक्षण
प्राकृतिक खेती को संगठित रूप देने के लिए विभाग ने पूरे प्रदेश में 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया है:
- 2 हजार क्लस्टर: राज्य के सभी जिलों में क्लस्टर बनाए गए हैं, जहां प्रत्येक क्लस्टर में 50 हेक्टेयर क्षेत्र और लगभग 125 किसान शामिल हैं।
- विशेषज्ञ प्रशिक्षण: उदयपुर स्थित प्राकृतिक खेती केंद्र के माध्यम से वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और किसान मास्टर ट्रेनरों को आधुनिक प्राकृतिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- कृषि सखी की भूमिका: किसानों के मार्गदर्शन के लिए प्रत्येक क्लस्टर में कृषि सखी/सीआरपी की नियुक्ति की गई है, जिन्हें कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा प्रशिक्षित किया गया है।
बायो इनपुट संसाधन केंद्रों की स्थापना
किसानों को स्थानीय स्तर पर प्राकृतिक उर्वरक (जीवामृत, घनजीवामृत आदि) उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार बायो इनपुट संसाधन केंद्र स्थापित कर रही है:
- वित्तीय सहायता: प्रत्येक संसाधन केंद्र के लिए 1 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
- वर्तमान स्थिति: अब तक प्रदेश में 180 बायो इनपुट संसाधन केंद्र सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं।
आत्मनिर्भर किसान और सुरक्षित पर्यावरण
राज्य सरकार की इस पहल से न केवल किसानों की रसायनों पर निर्भरता कम हो रही है, बल्कि खेती की लागत घटने से उनकी शुद्ध आय में भी बढ़ोतरी हो रही है। यह कदम स्वस्थ मिट्टी, सुरक्षित पर्यावरण और सतत कृषि विकास की दिशा में राजस्थान को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करेगा।
