नई दिल्ली/ नरेश गुनानी/केंद्र सरकार ने संसद में राजस्थान में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कार्यान्वयन, बीमित किसानों की संख्या, प्रीमियम भुगतान और दावों के निपटान से जुड़ा विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत किया है। लोकसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने योजना से जुड़े आंकड़े और प्रक्रियात्मक नियमों की जानकारी दी।
पिछले पांच वर्षों और वर्तमान सत्र का लेखा-जोखा
केंद्रीय राज्य मंत्री के अनुसार, विगत पांच वर्षों तथा वर्ष 2025-26 के दौरान राजस्थान में योजना के अंतर्गत बीमित किसानों और बीमित क्षेत्र का भू-उपयोग सर्वेक्षण के अनुसार सकल फसल क्षेत्र के साथ तुलनात्मक विवरण तैयार किया गया है। राज्यवार और जिलावार जानकारी को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया गया है।
इसके अतिरिक्त, खरीफ और रबी सीजन के दौरान बीमित क्षेत्र का वर्षवार विवरण तथा किसानों, राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा अंशदान किए गए प्रीमियम की राशि का ब्योरा भी साझा किया गया है। राजस्थान के सभी जिलों, विशेष रूप से झुंझुनू और चूरू जिलों के लिए पृथक रूप से जिलावार आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं, जिसमें नामांकित किसानों और उन्हें भुगतान किए गए बीमा दावों की स्थिति स्पष्ट की गई है।
पोर्टल पर सख्त सत्यापन और पात्रता मानदंड
संसद में यह भी स्पष्ट किया गया कि राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) पर प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों की गहन गुणवत्ता जांच और सत्यापन प्रक्रिया अपनाई जाती है ताकि योजना के दिशा-निर्देशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित हो सके।
आवेदनों की स्वीकृति के लिए निम्नलिखित मानक अनिवार्य हैं:
- बीमित फसल में हित: आवेदक का फसल में वास्तविक इंश्योरेबल इंटरेस्ट होना आवश्यक है।
- भूमि संबंधी दस्तावेज: भूमि के स्वामित्व, काश्तकार या बटाईदार होने का वैध प्रमाण होना अनिवार्य है।
- क्षेत्रफल का मिलान: बीमित भू-क्षेत्र का आकार वास्तविक बोए गए भू-क्षेत्र के बराबर या उससे कम होना चाहिए।
- फसल का सत्यापन: बीमित फसल और वास्तव में बोई गई फसल का समान होना आवश्यक है।
- पहचान का मिलान: किसान का नाम आधार कार्ड में दर्ज नाम के पूर्णतः अनुरूप होना चाहिए।
यदि किसी आवेदन में ये मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं होती हैं, या विवरण अधूरा या अस्पष्ट पाया जाता है, तो संबंधित बीमा कंपनियों द्वारा ऐसे आवेदनों को अस्वीकार करने का प्रावधान है।
वित्तीय सहायता और सब्सिडी व्यवस्था
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा प्रीमियम सब्सिडी का वित्तीय हिस्सा केवल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) के अंतर्गत ही प्रदान किया जाता है। राज्य सरकारों द्वारा अपने स्तर पर संचालित की जा रही किसी भी अन्य पृथक फसल बीमा योजना के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाती है।