नरेश गुनानी
जयपुर, 14 जून। राजस्थान सरकार ने राज्य में नमक उत्पादन को बढ़ावा देने और नमक उत्पादकों के हितों को सुरक्षित करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने वर्तमान में प्रचलित नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए ‘राजस्थान (लवण क्षेत्रों में भूखंड आवंटन) संशोधन नियम, 2026’ जारी कर दिए हैं। इस नए संशोधन से जहां नमक उद्योग में पारदर्शिता आएगी, वहीं लंबे समय से लंबित पड़ी समस्याओं का भी स्थायी समाधान होगा।
पारदर्शी होगी प्रक्रिया: लॉटरी की जगह ई-ऑक्शन
नए नियमों के तहत अब नमक उद्योग के लिए भूखंडों का आवंटन पूरी तरह पारदर्शी तरीके से ई-ऑक्शन (e-Auction) के माध्यम से किया जाएगा। इससे पहले यह प्रक्रिया लॉटरी प्रणाली पर आधारित थी।
इसके साथ ही, नए नियमों में कई अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान जोड़े गए हैं:
- अपील का अधिकार: आवंटन प्रक्रिया या किसी विवाद के संबंध में उत्पादकों को अपील करने का वैधानिक अधिकार दिया गया है।
- नमक इकाइयों का वर्गीकरण: उद्योगों की सहूलियत के लिए नमक इकाइयों के वर्गीकरण संबंधी स्पष्ट प्रावधान शामिल किए गए हैं।
- सर्वे और सीमांकन: जिन जिलों में नमक उत्पादन के लिए लवणीय (Saline) भूमि उपलब्ध है, वहां अब पहले व्यवस्थित सर्वे, सीमांकन और भूखंडों का मापन किया जाएगा, जिसके बाद ही आवंटन की आगामी कार्यवाही शुरू होगी।
वर्षों पुरानी मांग पूरी: निवेश और रोजगार के खुलेंगे नए रास्ते
नमक उत्पादकों द्वारा इन नियमों में बदलाव की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस संशोधन के बाद नए लवण क्षेत्रों में आवंटन का रास्ता साफ हो गया है, जिससे नमक उद्योग के क्षेत्र में भारी निवेश आने की उम्मीद है। औद्योगिक विस्तार होने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
300 वंचित इकाइयों को संजीवनी: लीज नवीनीकरण के लिए मिली 6 माह की छूट
पूर्व में लागू नियमों की विसंगतियों के कारण राज्य के नमक उत्पादक भारी परेशानियों का सामना कर रहे थे। पुराने नियमों में प्रावधान था कि यदि लीज समाप्त होने के चार वर्ष के भीतर नवीनीकरण नहीं कराया गया, तो उसके बाद नवीनीकरण का कोई विकल्प नहीं बचता था। इस कड़े नियम की वजह से राज्य की लगभग 300 नमक उत्पादक इकाइयां लीज नवीनीकरण से पूरी तरह वंचित हो गई थीं और उनका संचालन ठप होने की कगार पर था।
नमक उद्यमियों को इस बड़ी समस्या से राहत देते हुए राज्य सरकार ने एकमुश्त फैसला लिया है:
- वंचित रह गई सभी 300 इकाइयों को 6 महीने की विशेष एकमुश्त छूट प्रदान की गई है।
- इस समयावधि के भीतर ये इकाइयां अब अपनी लीज का नवीनीकरण (Renewal) करा सकेंगी।
- इस निर्णय से जहां एक ओर बंद होने की कगार पर खड़े नमक उद्योग फिर से चालू हो सकेंगे, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार के राजस्व (Revenue) में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।