| सुनील शर्मा
मंगलवार और गुरुवार को होगा सीधा संवाद; मुख्यमंत्री की पहल पर पारदर्शिता और जवाबदेही की नई मिसाल
जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की दूरगामी सोच और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर के कुशल निर्देशन में प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है। इसी क्रम में चिकित्सा शिक्षा विभाग ने प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ नामक एक क्रांतिकारी डिजिटल मंच की शुरुआत की है। यह मंच विभागीय समन्वय को निचले स्तर तक मजबूत करने के साथ-साथ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गति बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
समन्वय और पारदर्शिता का नया इको-सिस्टम
चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि स्वास्थ्य एक अत्यंत संवेदनशील विषय है, जिसमें त्वरित निर्णय और बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ के माध्यम से विभाग के उच्चाधिकारियों, मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों के प्राचार्यों, चिकित्सा अधीक्षकों, विभागाध्यक्षों, चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और विद्यार्थियों को एक साझा मंच प्रदान किया गया है। यह संवाद परक ई-मीटिंग इको-सिस्टम समाधान-उन्मुख दृष्टिकोण पर आधारित है।
सप्ताह में दो दिन: दो चरणों में संवाद प्रक्रिया
चिकित्सा शिक्षा आयुक्त नरेश गोयल ने इस नवाचार की कार्यप्रणाली को विस्तार से साझा किया। उन्होंने बताया कि यह संवाद प्रत्येक मंगलवार एवं गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दो चरणों में आयोजित किया जाएगा:
- प्रथम चरण (शाम 5:00 बजे): इसमें प्राचार्य, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, पीएमओ एवं विभागाध्यक्षों के साथ प्रशासनिक और नीतिगत विषयों पर चर्चा होगी।
- द्वितीय चरण (शाम 6:00 बजे): यह सत्र फैकल्टी, डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ, छात्रों और आमजन के लिए होगा, जिसमें वे सीधे अपनी समस्याओं और सुझावों को रख सकेंगे।
सुशासन दिवस पर शुरू हुए इस नवाचार को पहले ही दिन बड़ी सफलता मिली, जब 150 से अधिक लोकेशन्स से लोग ऑनलाइन इस संवाद से जुड़े।
इन प्रमुख विषयों पर होगा मंथन
डिजिटल मंच पर केवल चर्चा ही नहीं, बल्कि ठोस कार्ययोजना पर ध्यान दिया जाएगा:
- शिकायत निवारण: संपर्क पोर्टल, सीएमआईएस और सीपी-ग्राम्स पर प्राप्त शिकायतों का त्वरित निस्तारण।
- समीक्षा: बजट घोषणाओं, मुख्यमंत्री कार्यालय के दिशा-निर्देशों और नए मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण कार्यों की प्रगति की जांच।
- प्रशासनिक एवं वित्तीय विषय: मशीनरी व उपकरणों की खरीद और अस्पतालों की दैनिक समस्याओं का समाधान।
- नवाचार: स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नए सुझावों को प्रोत्साहन।
72 घंटे में अनिवार्य कार्यवाही (ATR)
इस मंच की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जवाबदेही है। बैठक में लिए गए निर्णयों को ‘इंस्टेंट मिनट्स’ के रूप में तुरंत रिकॉर्ड किया जाएगा। संबंधित अधिकारियों के लिए 72 घंटे के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। आयुक्त कार्यालय द्वारा सभी प्रकरणों की सतत निगरानी की जाएगी।
सुशासन का मील का पत्थर
आयुक्त गोयल ने विश्वास जताया कि इस पहल से चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ को मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर ही डिजिटल समाधान होगा। यह ‘ई-स्वास्थ्य संवाद’ राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और जन-हितैषी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।