जयपुर/ नरेश गुनानी/राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा ज़िलों से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दोनों ज़िलों के सरकारी अस्पतालों के गायनेकोलॉजी (स्त्री रोग) वार्डों में सर्जरी के महज़ एक हफ़्ते के भीतर आठ महिलाओं और एक नाबालिग लड़की की मौत हो गई। इस संवेदनशील मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
एनएचआरसी ने मुख्य सचिव को जारी किया नोटिस
इस दर्दनाक घटना को मानवाधिकारों के उल्लंघन का बेहद गंभीर मामला मानते हुए एनएचआरसी ने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब तलब करते हुए दो हफ्तों के भीतर एक विस्तृत और व्यापक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
दोनों सरकारी अस्पतालों में हुई मौतों का ब्यौरा
12 जुलाई 2026 को सामने आई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कुल 9 मौतें दो प्रमुख ज़िला अस्पतालों में ऑपरेशन के बाद हुईं:
- भीलवाड़ा (महात्मा गाँधी अस्पताल): यहाँ गायनेकोलॉजी वार्ड में सर्जरी होने के एक सप्ताह के भीतर पाँच महिलाओं की मौत हो गई।
- बांसवाड़ा ज़िला अस्पताल: यहाँ भी ऑपरेशन के बाद तीन महिलाओं और एक नाबालिग लड़की ने दम तोड़ दिया।
एक ही समय में और एक जैसे वार्डों में इतनी बड़ी संख्या में मौतों से हड़कंप मच गया है। शुरुआती अंदेशा चिकित्सा उपकरणों में संक्रमण (इन्फेक्शन) या दवाओं की गुणवत्ता में कमी की ओर इशारा कर रहा है।
उच्च स्तरीय जाँच के आदेश
जयपुर स्थित प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालयों ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। मौतों के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीमों द्वारा गहन जाँच की जा रही है। जाँच में इस बात को परखा जा रहा है कि क्या सर्जरी के दौरान तय मानकों (प्रोटोकॉल) की अनदेखी की गई थी।
स्वास्थ्य के अधिकार पर उठे सवाल
आयोग ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं देना सरकार की प्राथमिक ज़िम्मेदारी है। भीलवाड़ा और बांसवाड़ा की इस घटना ने सरकारी अस्पतालों के ऑपरेशन थिएटरों की स्वच्छता और सुरक्षा ऑडिट की पोल खोल दी है। जयपुर से जारी होने वाली एनएचआरसी की इस नोटिस के बाद अब देखना होगा कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग इस पर क्या कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करता है।