राजस्थान में खेजड़ी और हरे पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगा सख्त कानून; ड्राफ्ट पर हुई उच्च स्तरीय चर्चा

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

| गौरव कोचर

जयपुर, 22 मार्च 2026। राजस्थान सरकार राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित अन्य हरे पेड़ों के संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक नया और कठोर कानून लाने की तैयारी में है। रविवार को शासन सचिवालय में संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल की अध्यक्षता में इस प्रस्तावित विधेयक को लेकर तीसरी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

​सरकार का मुख्य उद्देश्य राज्य के पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना और अवैध रूप से पेड़ों की कटाई करने वालों पर लगाम कसना है।

बैठक के मुख्य बिंदु और निर्णय

​बैठक में राजस्व मंत्री हेमन्त मीणा, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव और विधि व राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। चर्चा के दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए:

  • विधेयक का प्रारूप प्रस्तुत: पिछली बैठक के निर्णयों के आधार पर तैयार किए गए विधेयक के शुरुआती ड्राफ्ट को पेश किया गया। अधिकारियों ने इसके हर पहलू पर विस्तार से चर्चा की।
  • संवेदनशील प्रजातियों की सूची: कानून के तहत केवल खेजड़ी ही नहीं, बल्कि अन्य दुर्लभ और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील पेड़ों की एक सूची तैयार की जाएगी। इन संरक्षित पेड़ों को काटने पर विशेष कड़े दंड का प्रावधान होगा।
  • आमजन की सुविधा का ध्यान: बैठक में मंत्री जोगाराम पटेल ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून इतना जटिल न हो कि सामान्य नागरिकों को खेती या अन्य जरूरी कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़े। सुरक्षा और सुविधा के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया।

प्रस्तावित कानून में क्या होगा खास?

​प्रस्तावित विधेयक में पेड़ों की कटाई रोकने के लिए एक मजबूत प्रशासनिक और न्यायिक ढांचा तैयार करने पर विचार किया गया है। इसमें निम्नलिखित प्रावधान शामिल हो सकते हैं:

  1. कठोर दंड: अवैध कटाई के लिए भारी जुर्माने और जेल की सजा के प्रावधान।
  2. स्पष्ट क्षेत्राधिकार: जांच और कार्रवाई के लिए अधिकारियों के अधिकारों का स्पष्ट विभाजन।
  3. त्वरित न्यायिक प्रक्रिया: मामलों के जल्द निपटारे के लिए अपील और प्राधिकरण की व्यवस्था।
  4. प्रभावी निगरानी: क्रियान्वयन के लिए एक विशेष टास्क फोर्स या अथॉरिटी का गठन।

अगला कदम

​बैठक में प्राप्त सुझावों को शामिल करते हुए अब विधेयक का संशोधित प्रारूप (Revised Draft) तैयार किया जाएगा। इसके बाद इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। सरकार की मंशा इस कानूनी ढांचे को जल्द से जल्द लागू करने की है ताकि राजस्थान की हरियाली को सुरक्षित रखा जा सके।

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