राजस्थान में खांसी के सिरप से बच्चों की तबीयत बिगड़ी, सीकर में मासूम की मौत, जयपुर में भी हालत गंभीर
रिपोर्ट हरि प्रसाद शर्मा पुष्कर, संपादन नरेश गुनानी, टेलीग्राफ टाइम्स।
जयपुर/सीकर/भरतपुर। राजस्थान में बच्चों को दी जा रही खांसी की दवा (डेक्सट्रोमेथॉरफन हाइड्रोब्रोमाइड सिरप) के कारण हाल ही में गंभीर साइड इफेक्ट के मामले सामने आए हैं। सीकर में एक 5 वर्षीय बच्चे नितियांस की मौत हो चुकी है, जबकि जयपुर में एक दो साल की बच्ची की तबीयत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।
घटना का विवरण
- सीकर के खोरी ब्राह्मणान गांव में नितियांस को खांसी की दवा दी गई थी, जिसके बाद उसकी हालत बिगड़ी और उसे अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया।
- जयपुर में भी उसी सिरप से एक बच्ची की तबीयत बिगड़ी, जिसे तुरंत निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
इस घटना से प्रदेश में इस सिरप को लेकर खौफ बढ़ गया है। चिकित्सा विभाग ने तुरंत दवा की सप्लाई पर रोक लगाकर इसके सभी बैचों को जांच के लिए लैब भेज दिया है।
दवा और वितरण
- दवा का निर्माण कायसन्स फार्मा, जयपुर में हो रहा है। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट सर्ना डूंगर औद्योगिक क्षेत्र में स्थित है।
- राजस्थान मेडिकल सर्विस कॉरपोरेशन लिमिटेड (RMSCL) ने इस कंपनी की सिरप को राज्य के सभी दवा केंद्रों पर वितरित करने से रोक लगा दी है।
- ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक ने कहा कि सभी बैच की जांच रिपोर्ट आने तक यह दवा न वितरित की जाएगी और न ही इस्तेमाल की जाएगी।
दवा से जुड़ी चेतावनी
- दावा किया गया है कि यह सिरप केवल वयस्कों के लिए उपयुक्त है।
- चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को देना सुरक्षित नहीं है।
- जिन बच्चों की तबीयत बिगड़ी है, उनकी उम्र चार साल से कम बताई जा रही है।
- भरतपुर के एक अस्पताल में दवा देने वाले चिकित्सक की भी तबीयत बिगड़ गई थी।
चिकित्सा विभाग की कार्रवाई
- सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों के औषधि प्रभारी तथा जिला औषधि भंडारगृहों को दवा की सप्लाई रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं।
- RMSCL के कार्यकारी निदेशक एवं विशेषाधिकारी जयसिंह ने बताया कि फिलहाल दो बैच की जांच की जा रही है, जबकि अन्य बैच भी एहतियातन होल्ड किए गए हैं।
- जांच रिपोर्ट आने के बाद ही भविष्य की कार्रवाई तय की जाएगी।
जनता से अपील
चिकित्सा विभाग और ड्रग कंट्रोलर ने सभी अभिभावकों से अनुरोध किया है कि जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आती, इस सिरप का उपयोग न करें और बच्चों को किसी भी अनजानी दवा न दें।
यह मामला प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा और दवा के सही उपयोग पर चेतावनी का प्रतीक बन गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने सभी अस्पतालों, फार्मेसियों और अभिभावकों से सतर्क रहने की अपील की है।