राजस्थान में कुपोषण पर हाईकोर्ट सख्त: “भूखे पेट भगवान को याद करना भी मुश्किल”

राजस्थान में कुपोषण पर हाईकोर्ट सख्त: “भूखे पेट भगवान को याद करना भी मुश्किल”

रिपोर्ट: प्रीति बालानी 
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 02,2025

जयपुर। राजस्थान में कुपोषण और अस्वास्थ्यकर भोजन को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति अनूप ढंड की एकलपीठ ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर 30 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि “भूखे पेट भगवान को भी याद करना मुश्किल होता है,” और यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम को सही भावना से लागू नहीं किया जा रहा।


भोजन को बताया ईश्वरीय आशीर्वाद

कोर्ट ने अपने आदेश में महात्मा गांधी के विचारों और वैदिक ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि भोजन को ईश्वरीय आशीर्वाद माना गया है। लेकिन आज स्थिति यह है कि सरकारें और प्रशासनिक अधिकारी इस प्राथमिक आवश्यकता की उपेक्षा कर रहे हैं।


अधिकारियों की लापरवाही से बढ़ा संकट

न्यायालय ने अफसरशाही पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में असफल रहे हैं, जिसके कारण बच्चों और महिलाओं को जो भोजन उपलब्ध हो रहा है, वह न केवल अस्वास्थ्यकर है, बल्कि कुपोषण और मोटापे दोनों का कारण बन रहा है।


जंक फूड से मानसिक विकास पर असर

कोर्ट ने विशेष रूप से जंक फूड और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की बढ़ती खपत पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि इनसे बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, एकाग्रता और संज्ञानात्मक विकास प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही, बच्चों को पारंपरिक और मौसमी खाद्य पदार्थों के प्रति प्रेरित करने की आवश्यकता बताई गई।


स्कूलों में लगे जंक फूड पर प्रतिबंध

हाईकोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में जंक फूड की बिक्री पर पाबंदी लगाई जाए। साथ ही, बच्चों को दादी-नानी की रसोई, घरेलू खानपान और स्थानीय आहार के लाभों की जानकारी दी जाए। इससे उन्हें पोषक और सुरक्षित भोजन की आदत डल सकेगी।


इन विभागों को भेजा गया नोटिस

हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निम्नलिखित विभागों और अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है:

  • केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, खाद्य मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय
  • भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI)
  • राज्य सरकार के मुख्य सचिव, एसीएस (बाल विकास), एसीएस (खाद्य), एसीएस (शिक्षा)

अगली सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट मांगी

कोर्ट ने इन सभी विभागों से 30 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि अब तक कुपोषण और जंक फूड से निपटने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी।


यह मामला केवल कानून का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट के इस सख्त रुख से यह उम्मीद जगी है कि राज्य में पोषण और खाद्य सुरक्षा की दिशा में ठोस सुधार देखने को मिलेंगे।

 

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