राजस्थान में कुत्तों का कहर: हर दिन 1100 से ज्यादा डॉग बाइट, 4 लाख से अधिक लोग बने शिकार

राजस्थान में कुत्तों का कहर: हर दिन 1100 से ज्यादा डॉग बाइट, 4 लाख से अधिक लोग बने शिकार
सरकारी सिस्टम की लापरवाही से बिगड़ते हालात, वैक्सीनेशन-नसबंदी योजनाएं सिर्फ कागज़ों पर

Edited By : नरेश गुनानी  (टेलीग्राफ टाइम्स /जून 27,2025                                                                                   जयपुर।राजस्थान में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनके हमलों ने आम जनजीवन को खतरे में डाल दिया है। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों का गली-मोहल्लों या पार्कों में खेलना भी असुरक्षित हो गया है। पिछले एक साल में प्रदेश में 4 लाख 22 हजार लोगों को कुत्तों ने काटा, यानी हर दिन औसतन 1100 से ज्यादा मामले सामने आए। इससे निपटने के लिए साल 2025-26 की शुरुआत में ही 86,965 एंटी-रेबीज़ वैक्सीन की डिमांड उठ चुकी है।


राज्य के पांच सबसे अधिक प्रभावित जिले

जिला मामले
जयपुर ग्रामीण 27,889
जयपुर शहरी 26,336
धौलपुर 26,112
कोटा 21,507
भरतपुर 13,863

भरतपुर, कोटा और उदयपुर में भयावह हालात

राज्य के कई जिलों से डरावनी घटनाएं सामने आई हैं:

  • भरतपुर: सेक्टर-3 कॉलोनी में एक ही कुत्ता दो दिन में 6 लोगों को काट चुका है।
  • कोटा: विवेकानंद नगर में डेढ़ साल के बच्चे पर तीन कुत्तों ने एक साथ हमला कर दिया।
  • उदयपुर: 8 साल का हुसैन खारोल कॉलोनी में 4 कुत्तों का शिकार बना।

इन घटनाओं ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की पोल खोल दी है बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर इनकी जवाबदेही किसकी है?


प्रशासनिक जिम्मेदारियों का टालमटोल

राज्य के पब्लिक हेल्थ डायरेक्टर डॉ. रवि प्रकाश शर्मा ने NDTV से बातचीत में कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी मरीज को समय पर वैक्सीन और सीरम देना है, लेकिन नगर निगम और पशुपालन विभाग को भी बराबर की भागीदारी निभानी चाहिए। अफसोस की बात ये है कि जब जिम्मेदारी तय करने की बारी आती है, तो अफसर एक-दूसरे पर जिम्मा डालते नजर आते हैं।


जयपुर नगर निगम पर उठे सवाल

जयपुर नगर निगम ग्रेटर के कमिश्नर गौरव सैनी का दावा है कि निगम द्वारा बीमार कुत्तों की पहचान की जा रही है और बजट का सही उपयोग हो रहा है। वहीं, निगम में नेता प्रतिपक्ष राजीव चौधरी का आरोप है कि जयपुर “डॉग बाइट की राजधानी” बन चुका है।

मार्च 2024 में नगर निगम ने Human Welfare Society को 2.10 करोड़ रुपये का तीन साल का टेंडर दिया था ताकि नसबंदी और रोकथाम के उपाय किए जा सकें। लेकिन हकीकत यह है कि हर दिन जयपुर में डॉग बाइट की 17 से 20 शिकायतें अब भी आती हैं।


सिर्फ कागजों में चल रही योजनाएं

डॉग बाइट के बढ़ते मामले सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता का आईना हैं। नसबंदी, टीकाकरण और शेल्टर जैसी योजनाएं कागजों से बाहर नहीं आ पाईं। इन मामलों में आम नागरिकों की चिंता और डर दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

समाधान की आवश्यकता

  • स्थानीय निकायों को जवाबदेह बनाया जाए
  • नसबंदी और वैक्सीनेशन के आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं
  • डॉग शेल्टर और रेस्क्यू टीम को सक्रिय किया जाए
  • बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़े

राजस्थान के लिए यह एक सामाजिक और स्वास्थ्य आपातकाल जैसा है। अगर अब भी संबंधित विभाग जागे नहीं, तो हालात और भयावह हो सकते हैं। यह सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।


 

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