| लोकेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर। राजस्थान सरकार ने राज्य के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME), हस्तशिल्पियों और बुनकरों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए ‘एकीकृत क्लस्टर विकास योजना’ के तहत बड़े कदमों को मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय इकाइयों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि उन्हें प्रसंस्करण या उत्पादन के लिए अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े।
फलोदी: सोनामुखी प्रसंस्करण में आएगी आधुनिकता
फलोदी के रीको क्षेत्र में वर्तमान में सोनामुखी प्रसंस्करण से जुड़ी 50 से अधिक इकाइयां कार्यरत हैं। इनमें से 14 इकाइयों की पहल पर एक कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित किया जाएगा।
- तकनीक: यहाँ पूर्णतः स्वचालित प्रोसेस चेन और एग्रो वेस्ट ब्रिकेटिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
- बचत: इस आधुनिक प्रणाली से अपशिष्ट (वेस्ट) में 15 फीसदी तक की कमी आएगी, जिससे सीधे तौर पर उत्पादन और मुनाफे में वृद्धि होगी।
- बजट: इस प्रोजेक्ट की कुल लागत 10 करोड़ रुपये है, जिसमें सरकार द्वारा 9 करोड़ रुपये का भारी अनुदान दिया जाएगा।
दक्षता विकास: लेदर और गोटा जरी दस्तकारों को प्रशिक्षण
परंपरागत कला को आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप ढालने के लिए सरकार प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर जोर दे रही है:
- लेदर क्लस्टर (चाकसू और चूरू): यहाँ जूती, चप्पल और बैग बनाने वाले 100-100 दस्तकारों को उन्नत प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए चाकसू के लिए 45.05 लाख और चूरू के लिए 47.69 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
- गोटा जरी (झुंझुनू): झुंझुनू शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की 100 महिला दस्तकारों को गोटा जरी के कार्य में निपुण बनाने के लिए 24.58 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे।
एकीकृत क्लस्टर विकास योजना: एक नज़र में
दिसंबर 2024 में अधिसूचित और जनवरी 2025 में विस्तृत दिशा-निर्देशों के साथ जारी इस योजना का लक्ष्य आगामी 3 वर्षों में राज्य के भीतर 50 क्लस्टर विकसित करना है।
मुख्य प्रावधान और सहायता:
- बजट आवंटन: प्रथम चरण में इस वर्ष 15 क्लस्टर के विकास हेतु 45 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
- पात्रता: एक ही स्थान पर कार्यरत कम से कम 20 समान उत्पादन वाली MSME इकाइयां इस योजना का लाभ ले सकती हैं।
- प्रक्रिया: योजना का लाभ उठाने के लिए कम से कम 10 इकाइयों को मिलकर एक ‘अलाभकारी कंपनी’ (Section 8 Company) बनानी होगी।
- अनुदान सहायता: * उत्पादन, जांच, भंडारण, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग सुविधाओं के लिए कुल लागत का 80 फीसदी तक अनुदान।
- हस्तशिल्पियों और बुनकरों के प्रशिक्षण के लिए 100 फीसदी तक सरकारी वित्तीय सहायता।
- विशेषज्ञ सहायता: प्रोजेक्ट के आवेदन से लेकर उसकी स्थापना तक की बाधाओं को दूर करने के लिए मुख्यालय पर विशेषज्ञों की एक विशेष टीम नियुक्त की गई है। साथ ही, जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्रों पर भी आवेदन की सुविधा उपलब्ध है।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होगा और निर्यात के नए अवसर पैदा होंगे।