जयपुर/ राजस्थान
राजस्थान: महिला सदनों की युवतियों के विवाह के लिए युवकों का इंटरव्यू, 11 वधुओं के लिए 1900 दूल्हे
रिपोर्ट: मुस्कान तिवाड़ी
Edited By : नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
जुलाई 04,2025
जयपुर। आपने अब तक लव मैरिज और अरेंज मैरिज के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने यह कल्पना की है कि किसी युवक को शादी के लिए बाकायदा इंटरव्यू देना पड़े? यह कोई फिल्मी कहानी नहीं बल्कि राजस्थान में हकीकत है, जहां महिला सदनों में रहने वाली उपेक्षित, उत्पीड़ित और निराश्रित युवतियों के विवाह के लिए एक अनूठी प्रक्रिया अपनाई जाती है।
राज्य के विभिन्न जिलों में संचालित महिला सदनों में ऐसी युवतियां रहती हैं जिन्हें समाज या परिवार ने ठुकरा दिया हो, या जिनके पास कोई सहारा न हो। जब ये बालिग होती हैं तो सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से उनके विवाह के लिए विशेष आयोजन किया जाता है, जो पूरी तरह सरकारी निगरानी में होता है।
11 वधुओं के लिए 1900 से अधिक आवेदन
हाल ही में विभाग की ओर से 11 युवतियों के विवाह के लिए योग्य वरों से आवेदन मांगे गए। विभाग को कुल 1900 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इस प्रक्रिया को पारदर्शी और संजीदगी से पूरा करने के लिए एक विशेष समिति गठित की गई।
समिति ने प्रत्येक आवेदक की विस्तृत पड़ताल की। इंटरव्यू लिए गए, पारिवारिक और सामाजिक पृष्ठभूमि की जांच की गई, यहां तक कि उनके निवास स्थान पर जाकर आस-पड़ोस से भी जानकारी ली गई। फिर इन सभी में से 11 युवकों को विवाह के लिए चुना गया।
विवाह से पहले युवतियों की सहमति भी जरूरी
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रक्रिया युवतियों की सहमति से ही पूरी होती है। जब योग्य युवकों की सूची तैयार हो जाती है, तो उन्हें महिला सदन लाया जाता है और युवतियों से परिचय कराया जाता है। बातचीत के बाद ही आगे का निर्णय होता है।
विवाह समारोह में मुख्यमंत्री होंगे शामिल
इस बार चयनित 11 युवकों में से 6 जयपुर, 2 नागौर जिले के डीडवाना-कुचामन, जबकि 3 अन्य झुंझुनूं, कोटा और बारां जिलों के निवासी हैं। ये विवाह समारोह भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा, जिसमें राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी शरीक होंगे।
अब तक 100 से अधिक विवाह सफलतापूर्वक कराए जा चुके
राज्य सरकार की इस सराहनीय पहल के तहत अब तक 100 से अधिक युवतियों के विवाह कराए जा चुके हैं। महिला सदनों में वे बालिकाएं रहती हैं जिन्हें न्यायालय, पुलिस, सामाजिक संगठनों या खुद के निवेदन पर सुरक्षा और पुनर्वास के लिए रखा गया होता है।
इन युवतियों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देने की दिशा में यह प्रयास एक अनूठा उदाहरण है, जो न केवल सामाजिक पुनर्वास की मिसाल है बल्कि सरकार की मानवीय पहल को भी दर्शाता है।

