राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव-2025 : राजस्थान मसालों को मिला वैश्विक मंच
- राजस्थान मसालों के लिए विश्व विख्यात, अब हर वर्ष होगा मसाला कॉन्क्लेव
- कृषि विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने और किसानों की समृद्धि के लिए अनेक कदम
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया विभिन्न विकास कार्यों का शिलान्यास-लोकार्पण
08 सितम्बर 2025, 21:45 PM | जयपुर, नरेश गुनानी। टेलीग्राफ टाइम्स।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान मसालों के उत्पादन और व्यापार का प्रमुख केंद्र होने के साथ ही मसालों की समृद्ध परंपरा के लिए विश्व विख्यात है। उन्होंने कहा कि राज्य में मसाला कॉन्क्लेव का आयोजन मसाला उद्योग को नई दिशा और गति प्रदान करेगा। उन्होंने कार्यक्रम में घोषणा की कि प्रदेश में अब हर वर्ष मसाला कॉन्क्लेव आयोजित किया जाएगा। इस संबंध में समिति का गठन भी किया जाएगा, जिससे मसाला उत्पादकों एवं व्यापारियों को वैश्विक मंच पर नए अवसर मिल सकें।

शर्मा सोमवार को जयपुर के बिड़ला सभागार में आयोजित राजस्थान मसाला कॉन्क्लेव-2025 में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान जीरा उत्पादन में देश में पहले, मैथी एवं सौंफ उत्पादन में दूसरे और धनिया एवं अजवाइन उत्पादन में तीसरे स्थान पर है।
वोकल फॉर लोकल से मसाला उद्योग को मजबूती
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वोकल फॉर लोकल की अवधारणा मसाला उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण रही है। केंद्र एवं राज्य सरकार विपणन व्यवस्था को मजबूत बनाने और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण से किसानों की आय दोगुनी करने के लिए योजनाएं संचालित कर रही हैं।
राजस्थान में आठ कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें कृषि उपज की जांच, छंटाई, ग्रेडिंग, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण की सुविधा उपलब्ध होगी।
अगले साल होगा ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट
मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि प्रसंस्करण, कृषि व्यवसाय एवं कृषि निर्यात प्रोत्साहन नीति के तहत राज्य में 1,497 कृषि आधारित औद्योगिक इकाइयों को लगभग 630 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। करीब 3,504 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है।
राइजिंग राजस्थान समिट से कृषि प्रसंस्करण क्षेत्र में 44 हजार करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। उन्होंने घोषणा की कि अगले साल की शुरुआत में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट आयोजित किया जाएगा।
जीआई टैग से मसालों को पहचान
राज्य के प्रमुख मसालों को जीआई टैग दिलवाया जा रहा है, जिससे उत्पादकों को वैश्विक पहचान और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा। राज्य में अब तक 913 कृषक उत्पादक संगठन (एफपीओ) पंजीकृत किए जा चुके हैं। साथ ही एफपीओ पॉलिसी भी तैयार की जा रही है।
कृषि प्रसंस्करण और विपणन प्राथमिकता
राज्य में 39 स्थानों पर फूड पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। मंडी यार्डों में विकास कार्य और किसानों के लिए संपर्क सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।
शर्मा ने बताया कि 148 लाख पात्र किसानों को 3,912 करोड़ रुपये का फसल बीमा क्लेम दिया गया है तथा खरीफ 2025 में 163 लाख फसल बीमा पॉलिसी सृजित हो चुकी है।
कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण और उन्हें खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए कृतसंकल्पित है।
शिलान्यास और लोकार्पण
मुख्यमंत्री ने आंगणवा (जोधपुर) और सोहेला (टोंक) के इन्क्यूबेशन सेंटर का वर्चुअल लोकार्पण किया। आंगणवा सेंटर में मसाले, दालें और सब्जियों की प्रोसेसिंग लाइन, कोल्ड स्टोरेज और फूड टेस्टिंग लैब स्थापित की गई है। सोहेला सेंटर में तेल मिल, फल-सब्जी प्रसंस्करण इकाई और टमाटर-मिर्च प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है।
उन्होंने सोनवा (टोंक) के फूड पार्क का भी वर्चुअल लोकार्पण किया। साथ ही, नए एफपीओ के प्रमाण पत्र, पीएम एफएमई योजना के लाभ वितरित किए और राज-स्पाइस ऐप लॉन्च किया।
मुख्यमंत्री ने 143.37 करोड़ रुपये के सड़क एवं मंडी विकास कार्यों का वर्चुअल शिलान्यास और 83.49 करोड़ रुपये के मंडी विकास कार्यों का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम में मसाला प्रसंस्करण और निर्यात पर डॉक्यूमेंट्री दिखाई गई और प्रदर्शनी में चयनित तीन सर्वश्रेष्ठ स्टॉल को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।
इस अवसर पर सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक, कृषि शासन सचिव राजन विशाल, बड़ी संख्या में कृषक, मसाला व्यापारी और कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे।