जयपुर/ नरेश गुनानी/राजस्थान में ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम’ (मनरेगा) के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की ताजा लेखापरीक्षा रिपोर्ट 21 अगस्त 2026 को राज्य विधानमंडल के पटल पर प्रस्तुत की गई। सदन में पेश किए जाने के बाद स्थापित संसदीय प्रक्रिया के तहत इस महत्वपूर्ण रिपोर्ट को आगे की विस्तृत जांच और समीक्षा के लिए राज्य विधानमंडल की ‘गृह तथा स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थाओं सम्बन्धी समिति’ को भेज दिया गया है।
संवैधानिक प्रावधान और प्रक्रिया
- अनुच्छेद 151 का अनुपालन: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 151 के तहत कैग अपनी राज्य संबंधी ऑडिट रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपते हैं, जिसे राज्यपाल के माध्यम से विधानमंडल के पटल पर रखवाया जाता है।
- संसदीय समिति को हस्तांतरण: सदन में प्रस्तुतीकरण के बाद रिपोर्ट को गृह, स्थानीय निकाय एवं पंचायती राज संस्थाओं से जुड़ी समिति के पास भेजा गया है, ताकि ग्रामीण विकास योजनाओं में वित्तीय पारदर्शिता और जमीनी स्तर पर हुए कार्यों का विस्तृत मूल्यांकन किया जा सके।
योजना के क्रियान्वयन पर नजर
इस रिपोर्ट में राजस्थान सरकार द्वारा मनरेगा योजना के संचालन, बजट आवंटन, मजदूरी भुगतान और कार्यों की गुणवत्ता से जुड़े पहलुओं का लेखाजोखा शामिल है। समिति अब रिपोर्ट के निष्कर्षों और सिफारिशों का अध्ययन कर अपनी टिप्पणी व सुझाव सदन के समक्ष रखेगी।