| नरेश गुनानी
जयपुर, 27 मार्च 2026 – राजस्थान को वैश्विक स्तर पर कौशल विकास का केंद्र (Skill Hub) बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शुक्रवार को शासन सचिवालय में कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता विभाग तथा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में स्पष्ट किया गया कि प्रदेश के युवाओं को खनन, टेक्सटाइल और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों में उनकी रुचि और उद्योगों की जरूरत के हिसाब से प्रशिक्षित कर सीधे रोजगार से जोड़ा जाएगा।
प्रमुख घोषणाएं और आगामी योजनाएं
राज्य की नई कार्ययोजना के तहत कौशल विकास के ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने की तैयारी है:
- ₹450 करोड़ का विश्व स्तरीय स्किल हब: बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप प्रदेश में 450 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक स्किल हब स्थापित किया जाएगा। इसके बेहतर क्रियान्वयन के लिए अप्रैल 2026 के पहले सप्ताह में अधिकारियों का एक दल भोपाल और भुवनेश्वर के केंद्रों का अध्ययन करेगा।
- इंटरनेशनल स्किलिंग सेंटर: जयपुर और भरतपुर में अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्किलिंग और ओवरसीज प्लेसमेंट सेंटर बनाए जाएंगे। इसके अलावा, 5-6 अन्य जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी केंद्र विकसित होंगे ताकि ग्रामीण युवाओं को विदेशों में रोजगार के अवसर मिल सकें।
- फ्यूचर स्किल्स और आईटीआई का कायाकल्प: प्रदेश के आईटीआई (ITI) संस्थानों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। NSDC अकादमी के सहयोग से चुनिंदा कॉलेजों और 20-25 आईटीआई में ‘फ्यूचर स्किल्स सेंटर्स’ शुरू किए जाएंगे।
विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम (अप्रैल 2026 से प्रारंभ)
कौशल विकास को समावेशी बनाने के लिए सरकार ने विशिष्ट क्षेत्रों को लक्षित किया है:
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सेक्टर |
कार्यक्रम का नाम |
लक्ष्य |
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पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी |
टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण |
7,000 युवाओं को प्रशिक्षण |
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नवीकरणीय ऊर्जा |
‘सोलर दीदी’ कार्यक्रम |
25,000 |
परिणाम-आधारित स्किलिंग: स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड
अतिरिक्त मुख्य सचिव संदीप वर्मा ने जानकारी दी कि राजस्थान सरकार अब स्किल इम्पैक्ट बॉन्ड के माध्यम से परिणाम-आधारित प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस मॉडल के तहत प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल कोर्स पूरा करना नहीं, बल्कि सुनिश्चित रोजगार होगा। इसके लिए मध्य प्रदेश के सफल मॉडल का अध्ययन कर अप्रैल 2026 के अंत तक अंतिम रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान औद्योगिक परिदृश्य को देखते हुए प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार किया जाए। बैठक में श्रम विभाग के शासन सचिव पी.सी. किशन, कौशल विभाग के आयुक्त रिशव मंडल और NSDC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुण कुमार पिल्लई सहित अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि मौजूद रहे।
