राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पर्यावरण जागरूकता पर विशेष कार्यशाला का आयोजन

राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल द्वारा पर्यावरण जागरूकता पर विशेष कार्यशाला का आयोजन — पर्यावरण शिक्षा किताबों में ही सीमित नहीं रहे, स्कूल की गतिविधियों का भी बने हिस्सा – अध्यक्ष, आरएसपीसीबी

रिपोर्ट नरेश गुनानी, टेलीग्राफ टाइम्स

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12 नवम्बर 2025, 06:29 PM
जयपुर, 12 नवम्बर। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) के अध्यक्ष डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए नियमों का पालन तभी प्रभावी हो सकता है जब नागरिक अपनी जिम्मेदारियों को समझें और उन्हें व्यवहार में लाएं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण शिक्षा की शुरुआत विद्यालय स्तर से होना अनिवार्य है। यह केवल पुस्तकों तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों की दैनिक गतिविधियों का हिस्सा बने, ताकि वे पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ बड़े हों।

डॉ. सुरपुर राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर में आयोजित आरएसपीसीबी की विशेष कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षकगण और मंडल के अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

फ़ोटो टेलीग्राफ टाइम्स

अध्यक्ष डॉ. रवि कुमार सुरपुर ने बताया कि यह शिक्षण संस्थाओं के साथ आयोजित की जा रही कार्यशालाओं की श्रृंखला की पहली कड़ी है। इसी प्रकार की कार्यशालाएं अब सभी जिलों में भी आयोजित की जाएंगी, ताकि पर्यावरण शिक्षा का संदेश अधिक से अधिक विद्यार्थियों तक पहुंच सके।

उन्होंने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों को पर्यावरण से जुड़े विषयों — जीवविज्ञान, रसायनशास्त्र, गणित और सामाजिक विज्ञान — के संदर्भ में व्यावहारिक रूप से जोड़ना है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित न रखकर व्यवहारिक प्रयोगों और गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है।

डॉ. सुरपुर ने कहा कि शिक्षा पर्यावरण संरक्षण की सबसे सशक्त नींव है। जब बच्चे अपने आस-पास के पर्यावरण को समझते और उसके संरक्षण में भाग लेते हैं, तभी समाज में स्थायी परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने विद्यालयों में वृक्षारोपण, अपशिष्ट प्रबंधन, जल संरक्षण और ऊर्जा बचत जैसी गतिविधियों को नियमित रूप से आयोजित करने का सुझाव दिया।

कार्यशाला में लगभग 50 से अधिक शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि एवं शिक्षाविद शामिल हुए। विषय विशेषज्ञों ने पर्यावरण संरक्षण के विभिन्न पहलुओं पर अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए और व्यावहारिक समाधान सुझाए।

इस अवसर पर पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए शिक्षकों को भी जिम्मेदारी सौंपते हुए कहा गया कि वे अपने छात्रों में “हरित सोच” विकसित करें, ताकि आने वाली पीढ़ी एक स्वच्छ, हरित और सतत पर्यावरण में जीवन व्यतीत कर सके।

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