राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस: खाकी ने किया समाज के ‘अनसंग हीरोज’ का वंदन, मानवीयता की मिसाल पेश करने वाले तीन नायक सम्मानित

गौरव कोचर 

जयपुर, 17 अप्रैल 2026 राजस्थान पुलिस के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य समारोह का समापन केवल परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मानवता और सामाजिक सरोकारों का संगम बन गया। राजस्थान पुलिस अकादमी (RPA) स्टेडियम में आयोजित ‘सांस्कृतिक संध्या’ के दौरान महानिदेशक पुलिस (DGP) श्री राजीव शर्मा ने समाज के उन तीन ‘असली नायकों’ को राज्य स्तरीय प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से पुलिस का सहयोग कर हजारों जिंदगियों में बदलाव लाया है।

पुलिस और जनता की भागीदारी: सुरक्षित प्रदेश की नींव

​सम्मान समारोह के दौरान डीजीपी श्री शर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि पुलिसिंग केवल अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुँचाना नहीं है, बल्कि समाज के साथ मिलकर एक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण तैयार करना है। उन्होंने सम्मानित होने वाले नागरिकों को ‘प्रेरणा का पुंज’ बताते हुए कहा कि पुलिस और जनता के बीच यही अटूट विश्वास एक सुरक्षित राजस्थान की असली नींव है।

सम्मानित होने वाले समाज के तीन ‘रत्न’

​राजस्थान पुलिस ने इस वर्ष प्रदेश के तीन ऐसे व्यक्तित्वों को चुना जिन्होंने आपदा, बाल सुरक्षा और मानवता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए हैं:

1. प्रकाश प्रजापति (सिरोही): लावारिसों के ‘वारिस’

​सिरोही के समाजसेवी प्रकाश प्रजापति पिछले 27 वर्षों से प्रशासन और पुलिस के लिए संकटमोचक बने हुए हैं।

  • सेवा का सफर: उन्होंने अब तक 1,584 लावारिस एवं दुर्घटना में मृत शवों का विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया है।
  • कोरोना काल का साहस: जब लोग अपनों के शवों को छूने से डर रहे थे, तब प्रकाश जी ने 360 कोरोना संक्रमित शवों का अंतिम संस्कार कर मानवता का फर्ज निभाया।
  • देहदान: उन्होंने स्वयं की देहदान की घोषणा करने के साथ ही 19 अन्य लोगों को भी इस पुनीत कार्य के लिए प्रेरित किया है।

2. सुजीत कश्यप उर्फ ‘राम’ (झालावाड़): जीवन बचाने का जुनून

​झालावाड़ के राम कश्यप कई मौकों पर ‘देवदूत’ बनकर सामने आए हैं।

  • नवजात को नया जीवन: दिसंबर 2025 की भीषण ठंड में झाड़ियों में छोड़े गए एक नवजात को बचाकर उन्होंने न केवल उसे अस्पताल पहुँचाया, बल्कि उसे कानूनी संरक्षण भी दिलाया।
  • बाढ़ में अदम्य साहस: वर्ष 2022 की प्रलयंकारी बाढ़ के दौरान उन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर 15-20 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकाला। सड़क हादसों और आपातकालीन चिकित्सा में वे सदैव पुलिस के मददगार रहे हैं।

3. श्रीमती सिंधु बिनुजीत (उदयपुर): बच्चों के भविष्य की रक्षक

​संभाग स्तरीय बाल सुरक्षा सलाहकार सिंधु बिनुजीत ने ‘स्मार्ट पुलिसिंग’ को एक नया मानवीय चेहरा दिया है।

  • बाल मित्र थाना: उनके द्वारा डूंगरपुर से शुरू किया गया ‘बाल मित्र थाना’ और ‘सुरक्षित विद्यालय’ नवाचार आज पूरे उदयपुर रेंज में लागू है।
  • बाल श्रम पर प्रहार: यूनिसेफ के साथ मिलकर उन्होंने बी.टी. कॉटन क्षेत्रों में होने वाले बाल श्रम और पलायन को रोकने में निर्णायक भूमिका निभाई, जिसकी सराहना स्वयं मुख्यमंत्री भी कर चुके हैं।

समापन की भव्यता

​स्थापना दिवस के इस समापन अवसर पर आरपीए स्टेडियम ‘सुरों की सरिता’ में सराबोर रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ ‘बड़े खाने’ का भी आयोजन किया गया, जिसमें पुलिस के जवानों और अधिकारियों ने एक साथ मिलकर भोजन किया।

“ये अनसंग हीरोज हमारी ताकत हैं। इनके कार्यों ने साबित किया है कि समाज और पुलिस मिलकर किसी भी चुनौती का सामना कर सकते हैं।” > — श्री राजीव शर्मा, महानिदेशक पुलिस, राजस्थान

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