गौरव कोचर/कंबोडिया और म्यांमार में चीनी माफिया के इशारे पर भारतीय युवाओं को बंधक बनाकर ठगी करवाने वाले एक बड़े अंतर्राष्ट्रीय गिरोह का राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम थाने ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है।
यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर चलाए जा रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान के तहत की गई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) विजय कुमार सिंह ने बताया कि भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) से प्राप्त सूचना, तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस संगठित नेटवर्क का लगातार खुलासा किया जा रहा है।
आकर्षक विदेशी नौकरी का झांसा और फिर ‘साइबर गुलामी’
पुलिस जांच में सामने आया कि यह गिरोह राजस्थान सहित भारत के विभिन्न राज्यों के युवाओं को 800 से 1000 अमेरिकी डॉलर प्रतिमाह वेतन का लालच देकर कंबोडिया, म्यांमार, वियतनाम, लाओस और थाईलैंड भेजता था।
वहां पहुंचने के बाद युवाओं के पासपोर्ट और पहचान पत्र छीन लिए जाते थे। इसके बाद उन्हें साइबर स्कैम सेंटरों में बंधक बनाकर डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश, क्रिप्टो फ्रॉड और जॉब स्कैम जैसी ठगी करने के लिए मजबूर किया जाता था।
गिरफ्तार 3 नए आरोपियों की भूमिका
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरिफ काठात उर्फ दीपू, कानू सिंह उर्फ पायथन और फिरोज काठात उर्फ माफिया को गिरफ्तार किया है। इनकी भूमिकाएं निम्न प्रकार थीं:
- फिरोज काठात उर्फ ‘माफिया’: बैंकॉक के रास्ते कंबोडिया पहुंचकर महिला बनकर सोशल मीडिया पर भारतीयों को फर्जी क्रिप्टो योजनाओं में फंसाने की ट्रेनिंग ली। यह नेटवर्क के लिए म्यूल अकाउंट्स और फर्जी प्रोफाइल संभालता था।
- कानू सिंह उर्फ ‘पायथन’: कंबोडिया जाकर महिला प्रोफाइल के जरिए ठगी करने के साथ-साथ प्रति व्यक्ति कमीशन के लालच में 4 अन्य भारतीय युवाओं को कंबोडिया स्कैम कंपाउंड में सप्लाई किया।
- आरिफ काठात उर्फ ‘दीपू’: फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल से निवेशकों को नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर फर्जी बैलेंस दिखाकर क्रिप्टो निवेश व “घर बैठे पैसे कमाएं” के नाम पर रकम ऐंठता था।
डिजिटल साक्ष्यों से खुल रहे वित्तीय नेटवर्क के राज
पूर्व में कोलकाता से गिरफ्तार आरोपियों जीतूराज उर्फ जेम्स, रवि उर्फ माही और अनिल उर्फ डेविल को ट्रांजिट रिमांड पर जयपुर लाकर की गई पूछताछ तथा बरामद मोबाइल, पासपोर्ट, व्हाट्सएप चैट और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े साक्ष्यों के विश्लेषण से कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस अब इस वित्तीय नेटवर्क और मानव तस्करी के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
यह कार्रवाई एसपी साइबर क्राइम सुमित मेहरड़ा के सुपरविजन एवं डीएसपी/थानाधिकारी गजेंद्र शर्मा के नेतृत्व में संपन्न हुई। टीम में प्रोबेशनर आरपीएस मनीष शर्मा, पुलिस निरीक्षक दामोदर, सहायक उप-निरीक्षक कमल किशोर, हेड कांस्टेबल प्रदीप, कांस्टेबल किशन, विजय सिंह, महेंद्र एवं बृजमोहन शामिल रहे।
सुरक्षित रहने के लिए पुलिस की एडवाइजरी
राजस्थान पुलिस ने आमजन को सतर्क रहने के लिए निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी किए हैं:
-
- एजेंसी का सत्यापन: विदेश में नौकरी के किसी भी ऑफर को स्वीकार करने से पहले भर्ती एजेंसी की प्रामाणिकता जांचें।
- दस्तावेजों की सुरक्षा: किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना पासपोर्ट या पहचान पत्र न सौंपें।
- फर्जी रिटर्न से बचें: सोशल मीडिया पर गारंटीड रिटर्न, क्रिप्टो या पार्ट-टाइम जॉब के लुभावने विज्ञापनों पर विश्वास न करें।
- संदिग्ध ऐप से दूरी: अनजान लिंक या ऐप डाउनलोड न करें।
साइबर हेल्पलाइन: किसी भी प्रकार की साइबर ठगी या डिजिटल अरेस्ट की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें या शिकायत दर्ज कराएं।