राजस्थान पंचायत और निकाय उपचुनाव में BJP का परचम लहराया, डोटासरा के गढ़ में कांग्रेस को करारी शिकस्त

राजस्थान पंचायत और निकाय उपचुनाव में BJP का परचम लहराया, डोटासरा के गढ़ में कांग्रेस को करारी शिकस्त

Edited By : गौरव कोचर
टेलीग्राफ टाइम्स
जून 09,2025

जयपुर।
राजस्थान की सियासत में भाजपा ने एक बार फिर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए पंचायत और नगर निकाय उपचुनावों में जबरदस्त जीत दर्ज की है। राज्य के 12 जिलों में हुए इन उपचुनावों में भाजपा ने कुल 36 में से 28 सीटों पर जीत हासिल की। इनमें से 27 पर भाजपा प्रत्याशी और 1 पर भाजपा समर्थित उम्मीदवार विजयी रहे, जबकि कांग्रेस महज 4 सीटों पर सिमट कर रह गई।

कांग्रेस के गढ़ में बड़ी हार

इस चुनावी परिणाम ने कांग्रेस को न केवल रणनीतिक रूप से झटका दिया, बल्कि सियासी रूप से भी कमजोर साबित कर दिया। खासतौर पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी पार्टी को पराजय का सामना करना पड़ा। इससे यह संकेत साफ है कि कांग्रेस अब अपनी पारंपरिक सीटों पर भी पकड़ खो रही है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ का हमला

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने इस जीत को राज्य सरकार की नीतियों और जनकल्याणकारी योजनाओं का जनसमर्थन बताया। उन्होंने कहा, “पंचायतीराज की 28 सीटों पर जीत, प्रदेश सरकार के विकास कार्यों पर जनता की मुहर है। कांग्रेस अब जनता से पूरी तरह कट चुकी है और उनकी आलोचनाएं अब असर नहीं कर रही हैं।”

राठौड़ ने आगे कहा, “कांग्रेस को अब दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी हालत देखनी चाहिए। उनकी आपसी खींचतान और सत्ता संघर्ष ने पार्टी को बिखेर दिया है।”

विधानसभा स्तर पर भाजपा की मजबूती

  • जिला परिषद की 6 में से 5 सीटों पर भाजपा ने कब्जा किया।
  • पंचायत समिति की 18 में से 12 सीटों पर भाजपा की जीत, कांग्रेस को केवल 3 सीटें मिलीं।
  • नगर पालिका की 12 में से 10 सीटों पर भाजपा का नियंत्रण।

इस आंकड़े ने भाजपा को राज्य के ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में राजनीतिक बढ़त दिला दी है।

कांग्रेस पर कानून व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप

राठौड़ ने हाल ही में हुए गुर्जर आंदोलन और अशोक गहलोत व सचिन पायलट की मुलाकात का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “अगर इस मुलाकात के बाद हालात बिगड़े हैं और ट्रेन रोकी गई है, तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे स्पष्ट होता है कि कांग्रेस में समन्वय नहीं है और आपसी सत्ता संघर्ष जारी है।”

उन्होंने विजय बैंसला के नेतृत्व में हो रहे आंदोलन से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि “विजय बैंसला ने भाजपा से कोई बातचीत नहीं की है, ट्रेन रोकना उचित नहीं है, खासकर जब शांति वार्ता हो चुकी हो।”

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