राजस्थान न्यूज़: नरेश मीणा ने दी 15 मई से जयपुर में आंदोलन की चेतावनी, बोले- ‘CM ने वादा पूरा नहीं किया तो…’
Reported By: दिव्या तिवाड़ी/ टोंक
Written By: नरेश गुनानी
टेलीग्राफ टाइम्स
मई 5, 2025
टोंक/जयपुर – एसडीएम थप्पड़कांड में गिरफ्तार हुए नरेश मीणा को सोमवार सुबह टोंक जिले की लिंक कोर्ट में पेश किया गया। पेशी के दौरान कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 9 मई तय की है। सुनवाई के बाद पुलिस वैन में सवार होकर वापस बूंदी जेल लौटते वक्त नरेश मीणा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया तो 15 मई से जयपुर में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
सीएम ने किया था वादा, लेकिन अभी तक अधूरा
दरअसल, नरेश मीणा की रिहाई के लिए उनके समर्थकों ने पहले जयपुर में आंदोलन का ऐलान किया था। आंदोलन से ठीक पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नरेश मीणा के पिता से मुलाकात कर आंदोलन को टालने की अपील की थी। इसके बदले में उन्होंने नरेश मीणा को जेल से रिहा करवाने का वादा किया था। लेकिन कई महीनों बाद भी यह वादा पूरा नहीं हो सका, जिससे अब नरेश के समर्थकों में गुस्सा है।
पुलिस वैन में दी आंदोलन की चेतावनी
नरेश मीणा ने कोर्ट से निकलते वक्त अपने समर्थकों से कहा, “अगर सरकार ने 15 मई तक वादा पूरा नहीं किया, तो हम जयपुर में आंदोलन शुरू करेंगे।” उनके इस बयान के बाद समर्थकों ने नारेबाजी की, जिससे माहौल briefly तनावपूर्ण हो गया, लेकिन पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखा।
टोंक जेल में जान का खतरा होने का दावा
टोंक से बूंदी जेल शिफ्ट होने के बारे में पूछे जाने पर नरेश मीणा ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “टोंक जेल में मेरी जान को खतरा था। वहां भ्रष्टाचार चरम पर है और कैदियों के साथ अन्याय हो रहा है। इसलिए मुझे बूंदी जेल में स्थानांतरित किया गया।”
नंगे पैर क्यों रहते हैं नरेश मीणा?
नरेश मीणा धार्मिक आस्था के कारण नंगे पैर रहते हैं। उन्होंने खाटूश्यामजी तक पैदल जाने का संकल्प लिया है, इसलिए चुनाव प्रचार से लेकर कोर्ट पेशी तक वे बिना चप्पल के ही नजर आते हैं। वे 14 नवंबर 2024 से जेल में बंद हैं और अब तक एक बार भी उन्हें जमानत नहीं मिली है।
आगे की राह
अब सबकी निगाहें 9 मई की कोर्ट सुनवाई और 15 मई की संभावित आंदोलन की तारीख पर टिकी हैं। अगर सरकार और प्रशासन इस मुद्दे पर कोई समाधान नहीं निकालते हैं, तो राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच सकती है।

