नई दिल्ली/जयपुर/ गौरव कोचर/राजस्थान के 309 नगर निकायों के चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित नतीजों में कुल 10,245 वार्डों में भाजपा ने 4,100 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज करते हुए बढ़त हासिल की है। कांग्रेस 3,600 से अधिक वार्डों के साथ दूसरे स्थान पर रही, जबकि 2,200 से अधिक वार्डों में निर्दलीयों और अन्य स्थानीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल कर कई निकायों में निर्णायक भूमिका अपने नाम कर ली है।
विपक्ष और विभिन्न संगठनों (जिनमें कॉकरोच जनता पार्टी जैसे मंचों द्वारा राज्य के स्कूलों की स्थिति व अन्य मुद्दों को लेकर बनाया गया चुनावी माहौल भी शामिल था) की घेराबंदी के बावजूद सत्तारूढ़ भाजपा शहरी मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल रही।
पीएम नरेंद्र मोदी का बयान: “डबल इंजन सरकार के सुशासन पर मुहर”
नतीजों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर राजस्थान की जनता का आभार जताते हुए लिखा:
“राजस्थान नगर निकाय चुनावों में भाजपा को प्रचंड जीत दिलाने के लिए प्रदेश की जनता का हृदय से आभार। यह जनादेश सत्य की जीत और झूठ के इको-सिस्टम की विदाई का स्पष्ट प्रमाण है।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि इस जनादेश के जरिए जनता ने एक बार फिर केंद्र और राज्य की “डबल इंजन” सरकार की विकास व सुशासन की नीतियों पर विश्वास जताया है। उन्होंने सभी विजयी प्रत्याशियों और पार्टी कार्यकर्ताओं को बधाई दी।
10 बड़े नगर निगमों का गणित: 4 पर भाजपा का कब्जा, 1 पर कांग्रेस, बाकी में निर्दलीय ‘किंगमेकर’
प्रदेश के 10 प्रमुख नगर निगमों में मुकाबला कड़ा रहा:
जयपुर नगर निगम: 150 वार्डों वाली राजधानी की एकीकृत निगम में भाजपा ने 78 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस को 53 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। (चार वार्डों में ईवीएम संबंधी तकनीकी कारणों से पुनर्मतदान होना है)।
कोटा, उदयपुर और भीलवाड़ा: इन तीनों नगर निगमों में भी भाजपा ने स्पष्ट बहुमत दर्ज किया है (कोटा में 55, उदयपुर में 53 और भीलवाड़ा में 45 सीटें)।
बीकानेर नगर निगम: कांग्रेस ने 80 में से 42 सीटें जीतकर यहां अपना बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया।
जोधपुर, अजमेर, पाली और भरतपुर: जोधपुर में दोनों प्रमुख दल 44-44 सीटों पर बराबरी पर रहे। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 सीटों पर कब्जा कर बड़ा उलटफेर किया। वहीं अजमेर और पाली में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी रही, जहां बोर्ड बनाने में निर्दलीयों की भूमिका तय होगी।
राजनीतिक मायने और आगामी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इसे सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताया, वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि वार्डों के पुनर्गठन और परिसीमन के बावजूद कांग्रेस ने शहरी क्षेत्रों में कड़ा मुकाबला दिया है।
पार्षद स्तर के नतीजों के बाद अब 21 सितंबर को महापौर/अध्यक्ष (चेयरपर्सन) और 22 सितंबर को उपमहापौर/उपाध्यक्ष के चुनाव होंगे, जिसके बाद सभी स्थानीय निकायों के नए बोर्ड विधिवत कार्यभार संभालेंगे।