राजस्थान: जल संरक्षण के लिए जन-भागीदारी पर जोर, मुख्य सचिव ने दिए मानसून पूर्व तैयारी के निर्देश
| गौरव कोचर
जयपुर, 09 फरवरी 2026 | राजस्थान में गिरते भू-जल स्तर को सुधारने और वर्षा जल के संचयन के लिए राज्य सरकार ने प्रयासों को और तेज कर दिया है। सोमवार को शासन सचिवालय में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जल संरक्षण की सभी योजनाओं में आमजन की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
मानसून से पहले तैयार हो ‘प्लांटेशन’ का ब्लूप्रिंट
मुख्य सचिव ने आगामी मानसून सत्र को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि वृक्षारोपण (प्लांटेशन) की विस्तृत और प्रभावी योजना अभी से तैयार कर ली जाए। उन्होंने कहा कि:
- जलागम क्षेत्रों (Watershed areas) का स्पष्ट सीमांकन समय पर पूरा हो।
- सभी स्वीकृत कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए।
- तालाब, चेकडैम, परकोलेशन टैंक, और टांका जैसी जल संरचनाओं के निर्माण में तेजी लाई जाए।
खेती और किसानों की आय पर फोकस
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने कहा कि भूमि और जल संरक्षण कार्यों का सीधा उद्देश्य वर्षा आधारित खेती को मजबूती प्रदान करना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे उन क्षेत्रों का वैज्ञानिक आकलन करें जहाँ इन परियोजनाओं के कारण:
- फसल पैटर्न में सकारात्मक बदलाव आया है।
- एक फसली क्षेत्र अब दो फसली क्षेत्र में परिवर्तित हो गए हैं।
- खेती योग्य बंजर भूमि में सुधार हुआ है और किसानों की आय बढ़ी है।
MJSA 2.0 और PMKSY की प्रगति
बैठक में मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 (MJSA 2.0) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के जलग्रहण विकास घटक की विस्तृत समीक्षा की गई। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि:
- MJSA 2.0 के तहत प्रदेश के बड़ी संख्या में गाँवों का चयन किया गया है।
- इसके माध्यम से लाखों हेक्टेयर भूमि को उपचारित किया जा रहा है, जिससे सूखे और जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को बड़ी राहत मिल रही है।
- नवीन जल संरचनाओं के निर्माण और पुराने तालाबों के नवीनीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
आधुनिक संरचनाओं से सुधरेगा भू-जल स्तर
मुख्य सचिव ने कंटूर ट्रेंच और अन्य जल संचयन ढांचों के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इन कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन से न केवल भू-जल स्तर ऊपर आएगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी राजस्थान अग्रणी बनेगा।
बैठक में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया और अपनी विभागीय प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।
