राजस्थान चैम्बर साहित्यकार सम्मान-2025 का भव्य आयोजन
हिन्दी, उर्दू और ढूंढाड़ी साहित्य के तीन रचनाकारों को मिला सम्मान
लोकेंद्र सिंह शेखावत
जयपुर। राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री एवं कृतिकार साहित्यिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को चैम्बर भवन में हर वर्ष की तरह इस बार भी राजस्थान चैम्बर साहित्यकार सम्मान-2025 का गरिमामय आयोजन हुआ। समारोह में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले तीन प्रतिष्ठित साहित्यकारों को प्रशस्ति-पत्र, शॉल और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना से हुआ। इसकी अध्यक्षता राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष डॉ. के.एल. जैन ने की। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. जितेन्द्र मक्कड़ (चेयरमैन एवं विभागाध्यक्ष, कार्डियोलॉजी विभाग, एटर्नल हॉस्पिटल, जयपुर) और विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ उपस्थित रहे।
डॉ. के.एल. जैन ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि साहित्य समाज का दर्पण है, जो संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को संजोकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान चैम्बर केवल उद्योग और व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज की बौद्धिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन देता रहा है।
मुख्य अतिथि डॉ. जितेन्द्र मक्कड़ ने साहित्य को समाज की चेतना जगाने वाला माध्यम बताते हुए कहा कि साहित्यकार समाज को नई दिशा देने वाले मनीषी होते हैं। उन्होंने सम्मानित साहित्यकारों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके विचार नई पीढ़ी को प्रेरित करते हैं। विशिष्ट अतिथि लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ ने भी अपने संबोधन में साहित्य की शक्ति और उसकी सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर निम्नलिखित साहित्यकारों को चैम्बर साहित्यकार सम्मान-2025 से सम्मानित किया गया—
- आलोक चतुर्वेदी – हिन्दी साहित्य में विशिष्ट योगदान के लिए
- रज़ा शैदाई – उर्दू साहित्य में उत्कृष्ट रचनात्मकता के लिए
- बुद्धि प्रकाश पारीक (मरणोपरांत) – ढूंढाड़ी साहित्य में अद्वितीय योगदान के लिए
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार शोभा चंदर पारीक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन चैम्बर के मानद महासचिव आनंद महरवाल ने प्रस्तुत किया। सम्मानित साहित्यकारों ने अपनी चुनिंदा रचनाओं का वाचन कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
राजस्थान चैम्बर का यह वार्षिक आयोजन न केवल साहित्यकारों के कार्यों को सम्मानित करने का मंच है, बल्कि नई पीढ़ी में साहित्य के प्रति जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन का महत्वपूर्ण प्रयास भी है। डॉ. के.एल. जैन ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे सम्मान समारोह साहित्यिक चेतना को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे।
