राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (RCCI) ​विशेष सत्र: भगवद गीता के माध्यम से व्यावसायिक उन्नयन एवं प्रबंधन कौशल पर मंथन

रिपोर्ट: योगेश शर्मा, जयपुर

जयपुर। उद्योग, व्यापार और उद्यमिता के समग्र विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राजस्थान चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज द्वारा एक विशेष ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। ‘भगवद गीता के माध्यम से व्यावसायिक उन्नयन, नेतृत्व विकास एवं प्रबंधन कौशल’ विषय पर आधारित यह सत्र ‘गौरआनगा इंस्टिट्यूट ऑफ वैदिक एजुकेशन’ (GIVE) के सहयोग से आयोजित हुआ।

आधुनिक कॉर्पोरेट जगत में गीता की प्रासंगिकता

​कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति के अनमोल ग्रंथ ‘श्रीमद्भगवद गीता’ के सिद्धांतों को आधुनिक व्यावसायिक परिप्रेक्ष्य में समझना था। आज के प्रतिस्पर्धात्मक और तनावपूर्ण व्यावसायिक वातावरण में निर्णय क्षमता, नैतिक मूल्य और नेतृत्व कौशल की भारी आवश्यकता है। सत्र में बताया गया कि किस प्रकार गीता के उपदेश—कर्मयोग, सकारात्मक सोच और आत्म-अनुशासन—व्यवसायिक सफलता के मजबूत आधार बन सकते हैं।

वृन्दावन चन्द्र दास जी का मुख्य संबोधन

​सत्र के मुख्य वक्ता, गौरआनगा इंस्टिट्यूट के संस्थापक एवं शिक्षा गुरु श्री वृन्दावन चन्द्र दास जी ने अपने अनुयायियों के साथ चैम्बर के सदस्यों को ‘एसेंशियल्स ऑफ भगवद गीता’ पर विस्तार से व्याख्यान दिया।

संबोधन के मुख्य अंश:

  • कर्मयोग: उन्होंने कहा कि गीता हमें परिणाम की चिंता किए बिना पूर्ण निष्ठा से कर्म करने की शिक्षा देती है। यह दृष्टिकोण व्यवसाय में बेहतर निर्णय लेने और तनाव प्रबंधन में सहायक है।
  • प्रेरणादायक कार्य संस्कृति: गीता का संदेश उद्यमियों को विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने और संगठन में एक सशक्त कार्य संस्कृति स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
  • व्यावहारिक दृष्टिकोण: श्री दास जी ने गीता के गूढ़ सिद्धांतों को सरल और व्यावहारिक तरीके से आधुनिक व्यापारिक चुनौतियों से जोड़कर प्रस्तुत किया।

इन प्रमुख विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा

​सत्र के दौरान व्यापारिक लाभ और व्यक्तिगत विकास के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया:

  1. फल की चिंता से मुक्ति: केवल कर्म पर ध्यान केंद्रित करना।
  2. मानसिक संतुलन: कठिन और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना।
  3. व्यावसायिक नैतिकता: ईमानदारी और नैतिक मूल्यों के साथ कार्य करना।
  4. निर्णय क्षमता: नेतृत्व में स्पष्टता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता का विकास।
  5. टीम मैनेजमेंट: सकारात्मक कार्य संस्कृति और सामूहिक विकास को बढ़ावा देना।

नेतृत्व के विचार

​चैम्बर के अध्यक्ष डॉ. के. एल. जैन ने कहा, “आज के युग में केवल आर्थिक प्रगति ही काफी नहीं है। व्यवसाय में नैतिकता और दूरदृष्टि का होना अनिवार्य है। यह सत्र हमारे सदस्यों को एक नई सोच और दिशा प्रदान करेगा। सफलता केवल रणनीतियों से नहीं, बल्कि सही दृष्टिकोण और मानसिक संतुलन से मिलती है।”

प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

​इस गरिमामयी कार्यक्रम में राजस्थान चैम्बर के कार्यकारी अध्यक्ष डी. एस. भण्डारी, डॉ. आर. एस. जैमिनी, सुधीर पालीवाल, आत्माराम गुप्ता, वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. अरुण अग्रवाल, उपाध्यक्ष ज्ञान प्रकाश, मानद महासचिव आनंद महरवाल, बृज बिहारी शर्मा, विजय गोयल, एन. के. जैन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर योगेश नारायण माथुर, सचिव दिनेश कानूनगो और अतिरिक्त सचिव कन्हैया लाल जांगिड़ सहित बड़ी संख्या में उद्योगपति, युवा उद्यमी और स्टार्टअप प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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