वर्ष 2027 तक सभी किसानों को दिन में बिजली देने का लक्ष्य; रात की कड़कड़ाती ठंड और खतरों से मिली मुक्ति
दिव्या तिवाड़ी
जयपुर/ टोंक ,3 जून। राजस्थान सरकार की महत्वपूर्ण पहल के तहत प्रदेश के किसानों को एक बड़ी सौगात मिली है। अब राज्य के 26 जिलों में कृषि कार्य के लिए दिन के दो ब्लॉक में बिजली सप्लाई की जा रही है। इस व्यवस्था के दायरे में हाल ही में प्रदेश के सर्वाधिक कृषि उपभोक्ताओं वाले चित्तौड़गढ़ जिले और टोंक जिले को भी शामिल कर लिया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2027 तक प्रदेश के सभी कृषि उपभोक्ताओं को दिन में बिजली उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता जताई है। ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर के निर्देशन में विद्युत वितरण निगम (डिस्कॉम्स) इस संकल्प को पूरा करने के लिए चरणबद्ध तरीके से काम कर रहे हैं।
चित्तौड़गढ़ और टोंक के किसानों को मिली प्राथमिकता
अजमेर और जयपुर डिस्कॉम के तहत आने वाले दो बड़े कृषि क्षेत्रों को इस योजना से जोड़ा गया है:
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- चित्तौड़गढ़ (अजमेर डिस्कॉम): यह प्रदेश का सर्वाधिक कृषि उपभोक्ताओं वाला जिला है। इस विद्युत सर्किल में कुल 1.01 लाख कृषि उपभोक्ता हैं।
- टोंक (जयपुर डिस्कॉम): इस सर्किल में 34,748 कृषि उपभोक्ता हैं।
- पूर्व में जुड़े जिले: इससे पहले अप्रैल महीने में जयपुर विद्युत वितरण निगम के दौसा और करौली जिलों को भी इस दायरे में लाया गया था।
किसानों को राहत: अब दिन में ही बिजली की उपलब्धता होने से किसानों को सर्दी और बरसात के मौसम में रात के समय खेतों में सिंचाई करने की मजबूरी से मुक्ति मिली है। वे अब रात में सुरक्षित रहकर अपने परिवार के साथ समय बिता पा रहे हैं।
डिस्कॉम वार स्थिति: इन 26 जिलों में मिल रही है दिन में सप्लाई
ऊर्जा सचिव एवं डिस्कॉम्स चेयरमैन आरती डोगरा के अनुसार, तीनों डिस्कॉम्स के अंतर्गत आने वाले निम्नलिखित जिलों में यह सुविधा सुचारू रूप से शुरू हो चुकी है:
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डिस्कॉम का नाम |
कवर्ड जिले |
शामिल जिलों के नाम |
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अजमेर डिस्कॉम |
14 में से 13 जिले |
अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन, उदयपुर, सलूम्बर, प्रतापगढ़, राजसमंद, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, झुन्झुनूं, सीकर एवं चित्तौड़गढ़ |
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जयपुर डिस्कॉम |
15 में से 10 जिले |
धौलपुर, बूंदी, कोटा, झालावाड़, जयपुर, डीग, भरतपुर, दौसा, करौली एवं टोंक |
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जोधपुर डिस्कॉम |
12 में से 3 जिले |
जालौर, सिरोही एवं पाली |
बाकी बचे जिलों में भी बिजली तंत्र और ग्रिड को मजबूत करने का काम तेजी से चल रहा है।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर: ढाई साल में सुदृढ़ हुआ विद्युत नेटवर्क
दिन के दो ब्लॉक में बिना बाधा के बिजली सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य के विद्युत तंत्र और ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है:
- राज्य स्तरीय विकास: पिछले ढाई वर्षों में 400 केवी, 220 केवी और 132 केवी के 59 ग्रिड सब स्टेशन (जीएसएस) तथा 33 केवी के 444 सब स्टेशन स्थापित किए गए हैं।
- चित्तौड़गढ़ में नया नेटवर्क: पिछले ढाई साल में 132 केवी के 2 और 33 केवी के 4 नए जीएसएस बनाए गए हैं, जिससे प्रसारण एवं वितरण क्षमता में 563 एमवीए की बढ़ोतरी हुई है।
- टोंक में क्षमता विस्तार: जिले में 33 केवी के 5 नए जीएसएस बनाए गए हैं और ट्रांसफार्मर क्षमता में 142.40 एमवीए की वृद्धि की गई है।
पीएम कुसुम योजना बनी इस बड़ी उपलब्धि का मुख्य आधार
दिन में बिजली की उपलब्धता बढ़ाने में पीएम कुसुम योजना गेम चेंजर साबित हो रही है। राज्य सरकार की तत्परता के कारण प्रदेश के ग्रामीण इलाकों (गांव-ढाणियों) में अब तक 4338 मेगावाट क्षमता की 1967 लघु सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं।
सौर ऊर्जा क्षमता के मामले में टोंक जिले में अब तक 34 मेगावाट और चित्तौड़गढ़ जिले में 46 मेगावाट क्षमता के सौर प्लांट लगाए जा चुके हैं, जो इस बिजली आपूर्ति को मुमकिन बना रहे हैं।