जयपुर/ सुनील शर्मा/प्रदेश के किसानों को निर्धारित दर पर पारदर्शी और सुगम तरीके से सब्सिडी युक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने डिजिटल प्रणाली का दायरा बढ़ा दिया है। गुरुवार से ‘डीबीटी पीओएस एप्लिकेशन’ के नए वर्जन 3.77 को राज्य के 11 अन्य जिलों में लागू किया जा रहा है।
पहले दो चरणों में 7 जिलों में सफल परीक्षण के बाद अब इसे बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक में शुरू किया गया है।
1 लाख से अधिक किसानों को मिला लाभ
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल के अनुसार, पिछले चरणों में इस डिजिटल व्यवस्था के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अब तक 1 लाख से अधिक किसान लगभग 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की ऑनलाइन बुकिंग कर चुके हैं।
- सब्सिडी का गणित: सरकार किसानों को यूरिया का एक बैग 267 रुपये की रियायती दर पर देती है, जबकि प्रति बैग लगभग 1,600 रुपये की सब्सिडी सरकार वहन करती है।
- कालाबाजारी पर रोक: गैर-सब्सिडी वाले औद्योगिक ग्रेड यूरिया की कीमत 2,500 रुपये से अधिक होने के कारण अक्सर कृषि यूरिया के दुरुपयोग और कालाबाजारी का जोखिम रहता है। डिजिटल व्यवस्था से केवल वास्तविक किसानों तक ही सब्सिडी पहुंचेगी।
फार्मर आईडी से वितरण और एग्रीस्टैक की स्थापना
उर्वरक की बिक्री अब पूरी तरह ‘फार्मर आईडी’ के माध्यम से की जाएगी। राजस्थान इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है, जहां अब तक 88.85 लाख किसानों की डिजिटल आईडी बनाई जा चुकी है। कृषि सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य में जल्द ही ‘एग्रीस्टैक कमिश्नरेट’ का गठन भी किया जा रहा है।
नई डिजिटल व्यवस्था के मुख्य लाभ
- टैगिंग पर रोक: उर्वरक विक्रेता अब किसानों को यूरिया या डीएपी के साथ जबरन अन्य गैर-जरूरी उत्पाद (टैगिंग) नहीं बेच सकेंगे।
- पारदर्शी निगरानी: स्टॉक और मांग की लाइव ट्रैकिंग होने से अधिक दर वसूलने और जमाखोरी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
- सरल प्रक्रिया: पीओएस वर्जन 3.77 को ग्रामीण नेटवर्क के अनुकूल अधिक तेज और स्थिर बनाया गया है, जिससे किसानों को दुकानों पर लंबी कागजी प्रक्रिया और कतारों से मुक्ति मिलेगी।
कृषि विभाग ने सभी उर्वरक कंपनियों, सहकारी समितियों और खुदरा विक्रेताओं को इस प्रणाली के सुचारू संचालन में सहयोग करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसानों को बिना किसी बाधा के समय पर खाद मिल सके।