फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा ‘राजस्थान एक्सपोर्ट्स कॉन्क्लेव’ आयोजित
‘ट्रेड बियॉन्ड बॉर्डर्स: इनेबलिंग राजस्थान्स ग्लोबल ग्रोथ स्टोरी’ थीम पर हुआ मंथन
उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं के कौशल विकास और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिया जोर
योगेश शर्मा
जयपुर। राजस्थान के सेकेंडरी सेक्टर (उद्योग, विनिर्माण, खनन और उपयोगिताओं) का वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था में लगभग 5.7 लाख करोड़ रुपये का योगदान है। विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप राज्य को इस योगदान को बढ़ाकर 50 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखना चाहिए। यह बात राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव तथा रीको लिमिटेड के चेयरमैन शिखर अग्रवाल ने कही। वे फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल द्वारा आयोजित ‘राजस्थान एक्सपोर्ट्स कॉन्क्लेव’ के उद्घाटन सत्र को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। कॉन्क्लेव की थीम ‘ट्रेड बियॉन्ड बॉर्डर्स: इनेबलिंग राजस्थान्स ग्लोबल ग्रोथ स्टोरी’ रही।
औद्योगिक विस्तार और स्किल गैप को पाटने की आवश्यकता
शिखर अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान का सेकेंडरी सेक्टर अभी राज्य के आर्थिक आउटपुट का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि प्रमुख औद्योगिक राज्यों में यह हिस्सेदारी 35 से 40 प्रतिशत तक है। यह अंतर राज्य में औद्योगिक विस्तार की व्यापक संभावनाओं को दर्शाता है।
उन्होंने बढ़ती युवा आबादी का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर बेरोजगारी और दूसरी ओर उद्योगों में कुशल मानव संसाधन की कमी एक बड़ी चुनौती है। इस अंतर को पाटना राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में होना चाहिए। उत्पादकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ मानव संसाधन और स्किलिंग में बड़ा निवेश करना होगा।
सिंगल-विंडो सिस्टम और लॉजिस्टिक्स को मजबूती
राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने ‘नो योर अप्रूवल’ (KYA) और CAF 2.0 (कॉमन एप्लीकेशन फॉर्म) जैसी पहलों का जिक्र किया, जो डिजिटल माध्यम से स्वीकृतियों को पारदर्शी और सुगम बना रही हैं।
इसके साथ ही उन्होंने पीएम गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, इनलैंड कंटेनर डिपो (ICD) और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि भीलवाड़ा आईसीडी के पुनरुद्धार और पुनः संचालन से स्थानीय उद्योगों को कंटेनरीकृत माल ढुलाई और निर्यात में बड़ी सहूलियत मिल रही है।
वैश्विक मानकों और रणनीतियों पर विशेषज्ञों के विचार
कॉन्क्लेव में उद्योग जगत एवं नीति विशेषज्ञों ने निर्यात बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए:
- गुणवत्ता और समयबद्ध आपूर्ति (दिलीप बैद): ईपीसीएच के पूर्व चेयरमैन दिलीप बैद ने कहा कि वैश्विक खरीदार अब समय पर डिलीवरी, सर्टिफिकेशन, क्वालिटी और कम्प्लायंस पर जोर दे रहे हैं। उन्होंने उद्योग को एक्सपोर्ट इंटेलिजेंस, प्रोडक्टिविटी, वैल्यू चेन, कोलेबोरेटिव अप्रोच और सस्टेनेबिलिटी पर फोकस करने का आह्वान किया।
- मजबूत राज्य स्तरीय निर्यात नीति (डॉ. राकेश मोहन जोशी): IIFT नई दिल्ली के वाइस चांसलर डॉ. जोशी ने बताया कि भारत के कुल निर्यात में राजस्थान की हिस्सेदारी करीब 2 से 2.5 प्रतिशत (लगभग 11.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) है। उन्होंने राज्य स्तरीय सशक्त एक्सपोर्ट पॉलिसी, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) के प्रभावी क्रियान्वयन और अनुकूल ट्रेड एग्रीमेंट्स पर जोर दिया।
- एमएसएमई को प्रोत्साहन (रिधिश राजवंशी): सीटीआईएल के सीनियर रिसर्च फेलो रिधिश राजवंशी ने कहा कि केंद्र द्वारा एमएसएमई के लिए स्वीकृत 25,000 करोड़ रुपये के सहयोग का उपयोग गुणवत्ता सुधार और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में किया जाना चाहिए।
- वित्तीय प्रबंधन और ESG कम्प्लायंस (रजनीश कुमार): एसबीआई के जनरल मैनेजर (NW-I) रजनीश कुमार ने निर्यातकों के लिए करेंसी रिस्क मैनेजमेंट, प्री व पोस्ट-शिपमेंट फाइनेंसिंग और इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के पालन को आवश्यक बताया।
वैश्विक वैल्यू चेन में राजस्थान की भूमिका
सत्र के आरंभ में फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के सदस्य एवं द्वारका जेम्स लिमिटेड के चेयरमैन के.बी. गोयल ने स्वागत भाषण देते हुए कहा कि जेम्स एंड ज्वैलरी, हैंडीक्राफ्ट्स, स्टोन, एग्री-प्रोडक्ट्स और रिन्यूएबल एनर्जी में राज्य के पास अपार क्षमताएं हैं।
धन्यवाद ज्ञापित करते हुए फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के को-चेयरमैन एवं इन्सोलेशन एनर्जी लिमिटेड के चेयरमैन मनीष गुप्ता ने चीन के मैन्युफैक्चरिंग मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए दीर्घकालिक विनिर्माण नीतियों की आवश्यकता है। सत्र का संचालन फिक्की राजस्थान स्टेट काउंसिल के एडवाइजर अजय सिंघा ने किया।
कॉन्क्लेव के दौरान दो विशेष प्लेनरी सत्रों का भी आयोजन हुआ, जिनमें ‘अनलॉकिंग न्यू ग्लोबल मार्केट्स: एफटीए, मार्केट एक्सेस व एक्सपोर्ट कॉम्पीटिटिवनेस’ और ‘स्ट्रैन्थनिंग राजस्थान एक्सपोर्ट ईकोसिस्टम: लॉजिस्टिक्स, फाइनेंस एंड हाई-ग्रोथ सेक्टर्स’ विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।